CM बनते ही विजय का बड़ा एक्शन, 15 दिनों में बंद होंगी दुकानें?

Updated on 2026-05-12T11:28:21+05:30

CM बनते ही विजय का बड़ा एक्शन, 15 दिनों में बंद होंगी दुकानें?

CM बनते ही विजय का बड़ा एक्शन, 15 दिनों में बंद होंगी दुकानें?

तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री विजय थलापति ने सत्ता संभालते ही बड़ा फैसला लेकर राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है. मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के तुरंत बाद विजय ने धार्मिक स्थलों, स्कूल-कॉलेजों और बस अड्डों के 500 मीटर दायरे में मौजूद 717 TASMAC शराब दुकानों को बंद करने का आदेश जारी कर दिया है. सरकार ने साफ कहा है कि अगले 15 दिनों के भीतर इस फैसले को पूरी तरह लागू किया जाए.

तमिलनाडु में शराब की दुकानों को लेकर लंबे समय से विरोध होता रहा है. खासकर महिलाओं, छात्रों और सामाजिक संगठनों की मांग रही है कि स्कूलों और मंदिरों के आसपास मौजूद शराब की दुकानों को हटाया जाए. हालांकि भारी राजस्व के कारण पिछली सरकारें इस मुद्दे पर बड़े कदम उठाने से बचती रही थीं.

शराब से सरकार को होती है भारी कमाई

तमिलनाडु में फिलहाल 5000 से ज्यादा सरकारी TASMAC शराब दुकानें संचालित हो रही हैं. इन दुकानों से राज्य सरकार को हर साल करीब 40 हजार करोड़ रुपये का राजस्व मिलता है. यही वजह रही कि चुनावी वादों के बावजूद राज्य में पूर्ण शराबबंदी कभी लागू नहीं हो सकी.

साल 2023 में एमके स्टालिन सरकार ने जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद करीब 500 दुकानों को बंद करने का फैसला लिया था. इनमें स्कूल-कॉलेजों और धार्मिक स्थलों के पास स्थित कई दुकानें शामिल थीं. सिर्फ चेन्नई में 61 दुकानों को बंद किया गया था, जबकि कांचीपुरम और मदुरै में भी कई शराब दुकानों पर ताले लगे थे.

विजय के फैसले से बढ़ी राजनीतिक हलचल

विजय के इस फैसले को उनके चुनावी वादों और “क्लीन गवर्नेंस” मॉडल की शुरुआत माना जा रहा है. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय लगातार बड़े और जनभावनाओं से जुड़े फैसले ले रहे हैं.

शपथ ग्रहण के बाद उन्होंने 200 यूनिट मुफ्त बिजली, महिलाओं के लिए फ्री बस यात्रा जैसी कई बड़ी घोषणाएं भी कीं. इसके अलावा पिछली सरकार की वित्तीय स्थिति को लेकर व्हाइट पेपर जारी कर उन्होंने सियासी बहस और तेज कर दी.

शराबबंदी पर क्यों फंसी रही सरकारें?

तमिलनाडु में शराबबंदी हमेशा बड़ा राजनीतिक मुद्दा रही है. जयललिता ने 2016 में धीरे-धीरे शराब दुकानें बंद करने की शुरुआत की थी, लेकिन पूरी तरह शराबबंदी लागू नहीं हो सकी.

राज्य सरकारों का तर्क रहा है कि अगर शराब पूरी तरह बंद कर दी गई तो अवैध शराब का कारोबार बढ़ सकता है, जिससे लोगों की जान को खतरा होगा. स्टालिन सरकार के दौरान नकली शराब से करीब 60 लोगों की मौत ने इस बहस को और तेज कर दिया था.

अब विजय सरकार के इस फैसले के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या तमिलनाडु धीरे-धीरे पूर्ण शराबबंदी की ओर बढ़ रहा है या यह सिर्फ शुरुआती सख्ती है.

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