रूस की आबादी किस ओर बढ़ रही है…. क्या मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ रही है
रूस की आबादी किस ओर बढ़ रही है…. क्या मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ रही है
अंतरराष्ट्रीय रिसर्च संस्थानों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रूस में मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ रही है। मौजूदा समय में रूस की कुल आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी करीब 10 से 15 प्रतिशत के बीच मानी जाती है, लेकिन जन्म दर और सामाजिक बदलावों के कारण यह अनुपात आगे और बढ़ सकता है। कुछ अनुमानों में दावा किया जा रहा है कि अगर यही रफ्तार रही, तो 2030 तक रूस की आबादी का एक बड़ा हिस्सा मुस्लिम समुदाय से हो सकता है।
इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह मुस्लिम समुदाय में अपेक्षाकृत ज्यादा जन्म दर बताई जा रही है। रूस के कई हिस्सों, खासकर काकेशस क्षेत्र और मध्य एशियाई मूल के लोगों में जनसंख्या वृद्धि तेज है। इसके अलावा प्रवासन भी एक अहम कारण है, क्योंकि पड़ोसी मुस्लिम बहुल देशों से रूस में काम और बसने के लिए लोग आ रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर रूस की पारंपरिक स्लाव आबादी में जन्म दर कम बनी हुई है। सरकार लंबे समय से जनसंख्या घटने की समस्या से जूझ रही है और इसे संतुलित करने के लिए कई योजनाएं भी लाई गई हैं। ऐसे में मुस्लिम आबादी की बढ़ती संख्या को जनसांख्यिकीय बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, न कि सिर्फ धार्मिक बदलाव के तौर पर।
हिंदुओं की बात करें तो रूस में उनकी आबादी बहुत सीमित है। यह मुख्य रूप से भारतीय मूल के लोग, छात्र और प्रोफेशनल्स हैं, जो पढ़ाई, व्यापार या नौकरी के लिए रूस में रहते हैं। कुल जनसंख्या में हिंदुओं की हिस्सेदारी बेहद कम मानी जाती है और इसमें बड़े बदलाव की कोई संभावना फिलहाल नहीं दिखती।
विशेषज्ञों का कहना है कि 2030 को लेकर किए जा रहे अनुमान निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं, बल्कि मौजूदा रुझानों पर आधारित आकलन हैं। हालांकि इतना साफ है कि रूस की जनसंख्या संरचना धीरे-धीरे बदल रही है और आने वाले वर्षों में इसका सामाजिक और राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है