लोहड़ी की आग ठंडी क्यों पड़ गई…

Updated on 2026-01-13T15:26:55+05:30

लोहड़ी की आग ठंडी क्यों पड़ गई…

लोहड़ी की आग ठंडी क्यों पड़ गई…

पंजाब में इस समय सर्दी अपने चरम पर है और इसके साथ ही घना कोहरा लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। पाथनकोट, गुरदासपुर, अमृतसर और आसपास के इलाकों में सुबह से लेकर देर तक कोहरे की मोटी चादर छाई रही। तापमान में लगातार गिरावट और बर्फीली हवाओं ने लोगों को घरों में सिमटने पर मजबूर कर दिया।

इसी सख्त मौसम का असर लोहड़ी के जश्न पर भी साफ नजर आया। आमतौर पर लोहड़ी की रात ढोल, भांगड़ा और अलाव के चारों ओर जुटी भीड़ से गुलजार रहती है, लेकिन इस बार हालात अलग रहे। ठंड इतनी ज्यादा थी कि लोग देर रात तक बाहर रुकने से बचते दिखे। कई जगहों पर छोटे स्तर पर ही लोहड़ी मनाई गई और सामूहिक आयोजनों में भीड़ कम रही।

पाथनकोट में न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी नीचे दर्ज किया गया। कोहरे की वजह से विजिबिलिटी बेहद कम रही, जिससे सड़कों पर आवाजाही भी प्रभावित हुई। सुबह के समय स्कूल जाने वाले बच्चों और ऑफिस जाने वाले लोगों को खास दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई जगहों पर ट्रेनें और बसें भी देरी से चलीं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ठंड और कोहरे के चलते इस बार त्योहार का उत्साह मन में तो था, लेकिन शरीर ने साथ नहीं दिया। बुजुर्गों और बच्चों को खास तौर पर घर से बाहर निकलने से रोका गया। बाजारों में भीड़ तो दिखी, लेकिन वो सामान्य लोहड़ी जैसी नहीं थी।

मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक ठंड और कोहरे से राहत के आसार कम ही बताए हैं। रात और सुबह के समय कोहरा और ज्यादा घना हो सकता है, वहीं तापमान में और गिरावट की संभावना जताई गई है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।

लोहड़ी किसानों और प्रकृति से जुड़ा त्योहार माना जाता है, लेकिन इस बार प्रकृति ने ही इसका रंग थोड़ा फीका कर दिया। इसके बावजूद लोगों ने अपने-अपने तरीके से परंपरा निभाई और घरों में ही लोहड़ी की रस्में पूरी कीं।

कुल मिलाकर, पंजाब में इस बार लोहड़ी का जश्न मौसम की मार के सामने दबा हुआ नजर आया। ठंड और कोहरे ने भले ही रौनक कम कर दी हो, लेकिन लोगों की उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मौसम सुधरेगा और सर्दी के इस दौर के बाद फिर से सामान्य जिंदगी की गर्माहट लौटेगी।