RPSC ने फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र देने वालों पर कड़ा शिकंजा क्‍यों कसा

Updated on 2025-12-03T14:55:55+05:30

RPSC ने फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र देने वालों पर कड़ा शिकंजा क्‍यों कसा

RPSC ने फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र देने वालों पर कड़ा शिकंजा क्‍यों कसा

Rajasthan Public Service Commission (RPSC) ने RAS-2024 इंटरव्यू के दौरान फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्रों पर सख्ती बढ़ा दी है। आयोग ने अब तक 524 ऐसे अभ्यर्थियों को डिबार किया है, जिनके दस्तावेज संदिग्ध पाए गए। 

RPSC ने बताया कि 24 नवंबर 2025 के नवीन सर्कुलर के अनुसार अब किसी भी दिव्यांग प्रत्याशी को भर्ती, आरक्षण या लाभ लेने के पहले सक्रिय UDID Card होना अनिवार्य है।  पुराने प्रमाण-पत्रों पर निर्भर अभ्यर्थियों को मेडिकल बोर्ड के माध्यम से पुनः जांच के लिए बुलाया गया है। 

कई मामलों में रिव्यू में पाया गया कि “लो-विजन” या “हार्ड-हियरिंग” जैसी श्रेणी में दिए गए प्रमाण-पत्रों में विसंगतियाँ थीं। आयोग का कहना है कि वास्तविक दिव्यांगता वाले लोगों को उनका हक मिलना चाहिए, न कि धोखाधड़ी करके आरक्षण का फायदा उठाने वालों को। 

डीबारे किए गए 524 अभ्यर्थियों में से 415 को आजीवन प्रतिबंधित किया गया है, जबकि बाकी 109 पर एक से पाँच साल तक की पाबंदी तय हुई है।  आयोग ने उन चिकित्सकों और अस्पतालों के खिलाफ भी कार्रवाई की बात कही है, जिनके माध्यम से फर्जी प्रमाण-पत्र दिए गए। 

यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्रों से नौकरियाँ और आरक्षण पाने की कोशिशें सामने आई हैं। RPSC का उद्देश्य साफ है,  भर्ती प्रक्रिया की सच्चाई बरकरार रखना और योग्य दिव्यांग उम्मीदवारों के अधिकारों की रक्षा करना। 

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