कर्नाटक में पुरानी डील की गूँज क्यों…

Updated on 2025-11-26T14:42:13+05:30

कर्नाटक में पुरानी डील की गूँज क्यों…

कर्नाटक में पुरानी डील की गूँज क्यों…

कर्नाटक में सीएम सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच टकराव खुलकर सामने आने के बाद सियासी हलचल तेजी से बढ़ गई है। राहुल गांधी ने फिलहाल पूरे मसले को ‘वेटिंग’ में डाल दिया, जिससे नाराज डीके शिवकुमार सीधे सोनिया गांधी के दरबार में जा पहुँचे। यहां उन्होंने वह बातें दोबारा दोहराईं जो पार्टी के शीर्ष नेताओं के बीच बनी गुप्त सहमति का हिस्सा थीं।

सूत्रों के मुताबिक सरकार बनने के समय 5–6 वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में एक अनौपचारिक डील तय हुई थी, जिसमें सत्ता का संतुलन दोनों नेताओं के बीच बारी-बारी से रखने का आश्वासन दिया गया था। शिवकुमार लगातार यही दावा करते रहे हैं कि उन्हें आधे कार्यकाल के बाद सीएम पद देने की बात कही गई थी। लेकिन अब जब समय नजदीक आता प्रतीत होता है, पार्टी का रुख बदलता हुआ लग रहा है।

राहुल गांधी के ठंडे रवैये से स्थिति और उलझ गई। दिल्ली में मौजूद कई विधायक डीके शिवकुमार के समर्थन में पहुँच रहे हैं, जबकि सिद्धारमैया गुट शांत रहकर स्थिति पर नजर बनाए हुए है। इसी बीच सोनिया गांधी से मुलाकात को डीके शिवकुमार ने एक तरह के ‘मोरल प्रेशर’ के रूप में इस्तेमाल किया है, ताकि हाईकमान पुरानी सहमति को याद रखे।

कर्नाटक कांग्रेस का यह विवाद इसलिए भी अहम है क्योंकि यह सीधे सरकार की स्थिरता से जुड़ा है। डीके शिवकुमार का कहना है कि उन्होंने पार्टी को सरकार तक पहुँचाने में बड़ी भूमिका निभाई, और अब उन्हें उनके हक से दूर किया जा रहा है। वहीं सिद्धारमैया समर्थक इसे दबाव की राजनीति बता रहे हैं।

दिल्ली से अब तक कोई अंतिम फैसला नहीं आया है, लेकिन साफ है कि पुरानी सीक्रेट डील की चर्चा ने मामले को और जटिल बना दिया है। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर यह दबाव बढ़ रहा है कि वे जल्द कोई रास्ता निकालें, क्योंकि जमीनी स्तर पर यह खींचतान सरकार को अस्थिर कर सकती है।

कर्नाटक की राजनीति इस समय ऐसे मोड़ पर है, जहाँ हर कदम अगले बड़े संकट की दिशा तय कर सकता है, और हाईकमान की चुप्पी इसे और रहस्यमय बना रही है।

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