क्यों कहा जाता है सोमालिया को समुद्री लुटेरों की धरती ।
क्यों कहा जाता है सोमालिया को समुद्री लुटेरों की धरती ।
अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र में स्थित Somalia को लंबे समय तक दुनिया "समुद्री लुटेरों की धरती" के नाम से जानती रही। यह नाम किसी लोककथा से नहीं, बल्कि 2000 के दशक में चरम पर पहुँची वास्तविक समुद्री डकैती की घटनाओं से जुड़ा है, जब अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर में हाईजैक किया जाने लगा। हालात इतने गंभीर हुए कि दुनिया की बड़ी नौसेनाओं को इस क्षेत्र में स्थायी गश्त लगानी पड़ी।
रणनीतिक समुद्री मार्ग और असुरक्षित तट
सोमालिया का समुद्री तट अफ्रीका में सबसे लंबों में गिना जाता है। यह तट अदन की खाड़ी से सटा है- वही समुद्री रास्ता जिससे यूरोप, एशिया और मध्य-पूर्व के बीच विशाल व्यापारिक जहाज गुजरते हैं। जब देश के भीतर कानून-व्यवस्था चरमरा गई, तो यही व्यस्त समुद्री मार्ग अपराध के लिए आसान लक्ष्य बन गया। जहाजों की संख्या अधिक, निगरानी कम और तट पूरी तरह असुरक्षित – यह संयोजन समुद्री डकैती के लिए अनुकूल साबित हुआ।
1991 का पतन: जब राज्य तंत्र बिखर गया
समस्या की जड़ 1991 में केंद्र सरकार के पतन और लंबे गृहयुद्ध से जुड़ी है। राष्ट्रीय संस्थान, नौसेना और तटरक्षक बल लगभग निष्क्रिय हो गए। समुद्री सीमा की निगरानी बंद हो गई। इस शून्य का फायदा पहले विदेशी ट्रॉलरों ने
उठाया - सोमाली जलक्षेत्र में अवैध मछली पकड़ना शुरू हुआ। साथ ही, तट के पास जहरीला कचरा फेंकने के आरोप भी लगे, जिससे स्थानीय आजीविका और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हुआ
मछुआरों की "रक्षा” से अपराध की ओर
स्थानीय मछुआरों ने शुरुआत में छोटे हथियारबंद समूह बनाए, खुद को "कोस्ट गार्ड” कहा और विदेशी ट्रॉलरों को खदेड़ने की कोशिश की। उनका दावा था कि वे अपने समुद्री अधिकारों की रक्षा कर रहे हैं। लेकिन जल्द ही एक नई वास्तविकता सामने आई- पकड़े गए जहाजों से फिरौती। यहीं से रक्षा और अपराध की रेखा धुंधली हुई और यह गतिविधि संगठित समुद्री डकैती में बदल गई।
संगठित फिरौती उद्योग
2008 से 2011 के बीच सोमाली समुद्री डकैती अपने चरम पर रही। बड़े मालवाहक जहाजों का अपहरण, चालक दल को बंधक बनाना और लाखों डॉलर की फिरौती मांगना आम हो गया। अंतरराष्ट्रीय आकलनों के अनुसार, उस समय वैश्विक अर्थव्यवस्था को सालाना अरबों डॉलर का नुकसान हुआ— बीमा प्रीमियम बढ़े, जहाजों के मार्ग बदले और सुरक्षा लागत में भारी वृद्धि हुई ।
अंतरराष्ट्रीय जवाब और गिरावट
स्थिति संभालने के लिए कई देशों की नौसेनाएँ क्षेत्र में तैनात हुईं। काफिले बनाकर जहाजों को निकाला जाने लगा, निजी सशस्त्र सुरक्षा बढ़ी और निगरानी सख्त हुई। इन कदमों से घटनाएँ धीरे-धीरे कम हुईं। फिर भी, सोमालिया की छवि पर समुद्री डकैती की छाप लंबे समय तक बनी रही।
सोमालिया की कहानी बताती है कि जब राज्य तंत्र कमजोर पड़ता है, तो भूगोल और अर्थव्यवस्था अपराध के अवसर बन सकते हैं। अवैध मछली शिकार, पर्यावरणीय क्षति और बेरोजगारी जैसे कारकों ने मिलकर समुद्र को अपराध की जमीन में बदल दिया। यही वजह है कि दुनिया ने इस देश को "समुद्री लुटेरों की धरती" कहा- एक ऐसी पहचान, जो राजनीतिक अस्थिरता और समुद्री सुरक्षा के अभाव से जन्मी ।
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