एक छात्रा की खामोशी क्यों नहीं सुनी गई…
एक छात्रा की खामोशी क्यों नहीं सुनी गई…
11वीं की बच्ची ने सुसाइड नोट में स्कूल में मिले दबाव और 'टॉर्चर' का जिक्र किया हरियाणा से सामने आया यह मामला दिल दहला देने वाला है। 11वीं कक्षा की एक छात्रा ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली, और पीछे छोड़े गए नोट ने पूरे इलाके में सवालों की आंधी खड़ी कर दी है। छात्रा ने नोट में उस मानसिक दबाव का जिक्र किया है, जो कथित रूप से उसे स्कूल में झेलना पड़ रहा था। सबसे गंभीर बात यह है कि उसने अपने मेल टीचर पर लगातार अपमानित करने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है।
नोट के मुताबिक, छात्रा को अजीबोगरीब काम कराए जाते थे, जिनमें से एक था—उंगलियों के बीच पेन दबाकर बंद मुट्ठी खोलने का "चैलेंज"। उसके अनुसार यह सब उसके लिए अपमानजनक था और वह मानसिक तौर पर टूटती जा रही थी। परिवार का कहना है कि बच्ची पिछले कुछ दिनों से बेहद चुप रहने लगी थी, लेकिन किसी ने अंदाजा नहीं लगाया कि वह इतने बड़े कदम की ओर बढ़ रही है।
परिवार ने स्कूल प्रशासन और आरोपी शिक्षक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बच्ची ने घर पर भी कई बार बताया था कि उसके साथ गलत व्यवहार होता है, लेकिन उन्होंने सोचा कि यह सामान्य स्कूल प्रेशर होगा। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और सुसाइड नोट को आधार मानकर मामले की तहकीकात की जा रही है।
स्थानीय लोगों और अभिभावकों के बीच गुस्सा साफ दिखाई दे रहा है। सभी का कहना है कि अगर बच्चों की शिकायतों पर पहले ध्यान दिया जाता, तो शायद यह घटना टल सकती थी। वहीं विशेषज्ञ फिर एक बार यह चेतावनी दे रहे हैं कि किशोरावस्था में मानसिक दबाव को हल्के में लेना बेहद खतरनाक हो सकता है।
यह घटना यह सोचने पर मजबूर करती है कि स्कूल, शिक्षक और समाज मिलकर बच्चों को सुरक्षित वातावरण देने में कहां चूक रहे हैं। दुखद बात यह है कि एक बच्ची ने मदद मांगने से पहले ही उम्मीद छोड़ दी। अब सवाल सिर्फ इतना है—क्या हम अगली आवाज़ को समय रहते सुन पाएंगे?
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