क्या मुंबई मेयर की कुर्सी पर होगा बड़ा उलटफेर
क्या मुंबई मेयर की कुर्सी पर होगा बड़ा उलटफेर
मुंबई की राजनीति एक बार फिर बेहद दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है। बीएमसी मेयर पद की रेस में मुकाबला इतना करीबी हो गया है कि अब हर वोट की कीमत बढ़ गई है। बीजेपी और शिंदे गुट जहां खुद को मजबूत स्थिति में मान रहे हैं, वहीं उद्धव ठाकरे गुट और विपक्षी दल भी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में नजर आ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि विपक्ष के पास जीत से महज आठ वोट कम हैं, जिसने इस मुकाबले को पूरी तरह ओपन बना दिया है।
बीएमसी का मेयर पद हमेशा से मुंबई की सत्ता का सबसे अहम केंद्र रहा है। यहां बैठने वाला नेता न सिर्फ शहर की दिशा तय करता है, बल्कि राज्य की राजनीति में भी उसका असर साफ दिखता है। इसी वजह से इस बार पर्दे के पीछे तेज हलचल है। हर गुट अपने पार्षदों को एकजुट रखने में जुटा है, ताकि आखिरी वक्त पर कोई चूक न हो जाए।
नंबरों की बात करें तो सत्ता पक्ष फिलहाल बढ़त में जरूर है, लेकिन यह बढ़त इतनी मजबूत नहीं कि निश्चिंत हुआ जा सके। कुछ नाराज पार्षद, अंदरूनी असंतोष या आखिरी समय की रणनीति पूरा समीकरण पलट सकती है। यही वजह है कि अब चर्चा छुपे रुस्तम की हो रही है, जो ऐन वक्त पर खेल बदल सकता है।
विपक्ष की रणनीति साफ है। वह सत्ता पक्ष के भीतर मौजूद असंतोष को भुनाने की कोशिश कर रहा है। उद्धव ठाकरे गुट का मानना है कि शिवसेना की पारंपरिक पकड़ अब भी मुंबई में कमजोर नहीं हुई है और अगर सही मौके पर सही चाल चली गई, तो मेयर की कुर्सी हाथ लग सकती है। दूसरी ओर कांग्रेस और अन्य छोटे दल भी इस मौके को गंवाना नहीं चाहते।
सत्ता पक्ष की चिंता यह है कि कहीं यह मुकाबला सिर्फ आंकड़ों का खेल बनकर न रह जाए। इसलिए लगातार बैठकों का दौर चल रहा है, पार्षदों से संपर्क साधा जा रहा है और एकजुटता का संदेश दिया जा रहा है। हर किसी की नजर उस पल पर है, जब वोटिंग होगी और साफ हो जाएगा कि किसकी रणनीति काम आई।
फिलहाल मुंबई मेयर की रेस में कुछ भी तय मान लेना जल्दबाजी होगी। यहां जीत सिर्फ संख्या से नहीं, बल्कि भरोसे और रणनीति से तय होगी। आने वाले वक्त में यह साफ हो जाएगा कि इस सियासी शतरंज में असली बाजीगर कौन निकला और कौन सिर्फ चालें चलता रह गया।
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