Ash Wednesday 2026: राख बुधवार आज से, क्यों रखते हैं 40 दिन उपवास
Ash Wednesday 2026: राख बुधवार आज से, क्यों रखते हैं 40 दिन उपवास
Ash Wednesday 2026: आज 18 फरवरी 2026 से राख बुधवार के साथ ईसाई समुदाय के पवित्र काल लेंट की शुरुआत हो गई है. यह 40 दिनों की धार्मिक अवधि होती है, जिसमें लोग उपवास, प्रार्थना, पश्चाताप और दान-पुण्य के माध्यम से ईश्वर के करीब आने का प्रयास करते हैं. इस अवधि की समाप्ति ईस्टर संडे के दिन होती है, जिसे ईसाई धर्म का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है.
राख बुधवार को 40 दिनों के उपवास काल की शुरुआत माना जाता है. इस दिन चर्च में पादरी श्रद्धालुओं के माथे पर राख से क्रॉस का निशान बनाते हैं. यह निशान जीवन की नश्वरता का प्रतीक होता है और लोगों को अपने कर्मों पर विचार करने की याद दिलाता है. इस दौरान कई लोग अपनी इच्छा से उपवास रखते हैं और दिन में केवल एक बार भोजन करते हैं.
लेंट की शुरुआत राख बुधवार से होती है, क्योंकि धार्मिक परंपराओं के अनुसार यह उपवास और आत्मचिंतन का विशेष समय माना जाता है. प्रारंभिक चर्च ने ईस्टर की तारीख तय होने के बाद इस उपवास काल को मान्यता दी और तब से यह परंपरा जारी है.
लेंट की अवधि 40 दिनों की होती है, जिसका संबंध बाइबल की कई महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ा है. माना जाता है कि मूसा ने 40 दिन तक ईश्वर से मार्गदर्शन प्राप्त किया था. इसके अलावा नूह ने 40 दिन तक वर्षा का सामना किया, एलियाह ने 40 दिन की यात्रा की और यीशु मसीह ने भी रेगिस्तान में 40 दिन उपवास और प्रार्थना की थी. इन्हीं मान्यताओं के आधार पर लेंट का उपवास 40 दिनों तक रखा जाता है.
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