आम आदमी को बड़ा झटका! दूध के बाद ब्रेड भी महंगी

Updated on 2026-05-19T13:56:03+05:30

आम आदमी को बड़ा झटका! दूध के बाद ब्रेड भी महंगी

आम आदमी को बड़ा झटका! दूध के बाद ब्रेड भी महंगी

Bread Price Hike:  महंगाई ने आम आदमी को एक और बड़ा झटका दे दिया है. सोना-चांदी, पेट्रोल-डीजल और रोजमर्रा की चीजों के बढ़ते दामों के बीच अब सुबह का नाश्ता भी महंगा हो गया है. मुंबई में ब्रेड की कीमतों में सीधा 5 रुपये तक का इजाफा कर दिया गया है. नई कीमतें 16 मई से लागू हो चुकी हैं, जिससे लाखों परिवारों की जेब पर असर पड़ने वाला है.

ब्रेड, पाव और सैंडविच जैसी चीजें हर घर की जरूरत बन चुकी हैं. कई लोगों के दिन की शुरुआत ही ब्रेड से होती है, लेकिन अब वही ब्रेड पहले से ज्यादा महंगी मिलने लगी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई बड़ी कंपनियों ने अपने प्रोडक्ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है.

आखिर क्यों बढ़े ब्रेड के दाम?

 ब्रेड कंपनियों का कहना है कि उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है. सबसे बड़ा कारण पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक कच्चे माल की महंगाई है. भारत इस प्लास्टिक पाउडर का बड़े स्तर पर आयात करता है और रुपये की कमजोरी के कारण इसकी लागत काफी बढ़ गई है.

अलग- अलग ब्रेड की कीमत- 

1. 400 ग्राम सैंडविच ब्रेड

आधी – ₹40

आता – ₹45

2. होल व्हीट ब्रेड

आधी – ₹55

आता – ₹60

3. मल्टिग्रेन ब्रेड

आधी – ₹60

आता – ₹65

4. स्मॉल ब्राऊन लोफ

आधी – ₹28

आता – ₹30

5. व्हाईट लोफ

आधी – ₹20

आता – ₹22

6. ब्राऊन ब्रेड

आधी – ₹45

आता – ₹50

ब्रेड की कीमतों में हुई बढ़ोतरी अब सीधे आम आदमी की जेब पर असर डालने लगी है. मुंबई में हर ब्रेड लादी पर 5 रुपये तक का इजाफा किया गया है, जिससे सिर्फ ब्रेड ही नहीं बल्कि उससे बनने वाले तमाम फूड आइटम भी महंगे होने वाले हैं. खासकर वड़ा पाव, मिसल पाव, भाजी पाव, सैंडविच और दूसरे स्नैक्स के दाम बढ़ने की आशंका है.

मुंबई जैसे शहर में लाखों लोग रोजाना ब्रेड से बने खाने पर निर्भर रहते हैं. ऑफिस जाने वाले कर्मचारी, मजदूर, छात्र और छोटे कारोबारियों के लिए ब्रेड आधारित फूड सबसे सस्ता और आसान विकल्प माना जाता है. ऐसे में कीमत बढ़ने का सीधा असर उनके रोजमर्रा के खर्च पर पड़ेगा.

सिर्फ व्हाइट ब्रेड ही नहीं, बल्कि सैंडविच ब्रेड, होल व्हीट और मल्टीग्रेन ब्रेड भी महंगी हो गई हैं. कई इलाकों में ब्राउन ब्रेड की कीमत 45 रुपये से बढ़कर 50 रुपये तक पहुंच गई है.

बेकरी मालिकों का कहना है कि बढ़ती उत्पादन लागत ने उन्हें मजबूर कर दिया है. प्लास्टिक पैकेजिंग, ट्रांसपोर्टेशन, आयातित कच्चे माल और रुपये की गिरती कीमत की वजह से खर्च तेजी से बढ़ा है. इसके अलावा हाल ही में दूध के दाम बढ़ने से भी खाने-पीने की चीजों पर दबाव बढ़ गया है.

अब चिंता इस बात की है कि अगर महंगाई का यही सिलसिला जारी रहा, तो आम लोगों के लिए रोजमर्रा का नाश्ता और स्ट्रीट फूड भी जेब पर भारी पड़ने लगेगा.

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