मदरसों में वंदे मातरम अनिवार्य करने पर बंगाल में विवाद, सियासी घमासान तेज

Updated on 2026-05-21T12:14:03+05:30

मदरसों में वंदे मातरम अनिवार्य करने पर बंगाल में विवाद, सियासी घमासान तेज

मदरसों में वंदे मातरम अनिवार्य करने पर बंगाल में विवाद, सियासी घमासान तेज

पश्चिम बंगाल सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए राज्य के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त मदरसों में कक्षाएं शुरू होने से पहले ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य कर दिया है. अब हर मदरसे में प्रार्थना सभा (असेंबली) के दौरान राष्ट्रगीत गाना जरूरी होगा, जिससे राज्य में राजनीतिक बहस तेज हो गई है.

इस आदेश की पुष्टि राज्य के अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा मंत्री खुदीराम टुडू ने की है. उन्होंने कहा कि जब सरकारी स्कूलों और संथाली भाषा वाले स्कूलों में पहले से ही ‘वंदे मातरम्’ अनिवार्य है, तो मदरसों को इससे अलग क्यों रखा जाए. सरकार का कहना है कि यह कदम सभी शैक्षणिक संस्थानों में समानता और राष्ट्रभावना को बढ़ावा देने के लिए लिया गया है.

मदरसा शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि पुराने सभी नियमों और प्रथाओं को रद्द कर यह नया नियम तत्काल प्रभाव से लागू किया जा रहा है. आदेश के दायरे में अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी सरकारी मॉडल मदरसे, मान्यता प्राप्त सहायता प्राप्त मदरसे, शिशु शिक्षा केंद्र और गैर-सहायता प्राप्त मदरसे शामिल होंगे.

इससे पहले 13 मई को पश्चिम बंगाल शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में भी ‘वंदे मातरम्’ को अनिवार्य करने की अधिसूचना जारी की थी. बाद में 14 मई को इसे मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया, जिससे यह मामला और अधिक सुर्खियों में आ गया.

सरकार के इस फैसले को लेकर जहां एक ओर समर्थन मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक विवाद भी गहराता जा रहा है. विपक्ष का कहना है कि इस तरह के आदेश से शैक्षणिक संस्थानों में अनावश्यक बहस पैदा हो सकती है. वहीं सरकार इसे राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक जुड़ाव का कदम बता रही है.

यह भी पढ़े 

Rahul Gandhi का PM पर बड़ा हमला, BJP ने बताया जनता का अपमान