केरल मंदिर उत्सव में बेकाबू हाथी, युवक पर जानलेवा हमला

Updated on 2026-02-28T11:15:40+05:30

केरल मंदिर उत्सव में बेकाबू हाथी, युवक पर जानलेवा हमला

केरल मंदिर उत्सव में बेकाबू हाथी, युवक पर जानलेवा हमला

केरल के थ्रिसूर जिले में आयोजित एक मंदिर उत्सव के दौरान उस समय अफरातफरी मच गई, जब जुलूस में शामिल एक हाथी अचानक बेकाबू हो गया और उसने पास खड़े एक युवक पर हमला कर दिया। यह घटना अन्नमनाडा महादेवा मंदिर में चल रहे 'वलियाविलक्कू उत्सव के दौरान हुई। घटना का महज सात सेकंड का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने लोगों को झकझोर कर रख दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंदिर में वार्षिक उत्सव की तैयारियां जोरों पर थीं। पारंपरिक जुलूस के लिए सजे-धजे हाथियों को तैयार रखा गया था। इसी दौरान एक हाथी, जो जुलूस का हिस्सा बनने वाला था, अचानक उत्तेजित हो गया। वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ लोग हाथी के बेहद करीब खड़े थे। तभी हाथी ने अचानक एक युवक को अपनी सूंड में लपेट लिया।

चंद पर्तों में हालात बेकाबू हो गए। हाथी ने युवक को पैरों से पकड़ा और हवा में उछालकर जमीन पर पटक दिया। यह दृश्य इतना भयावह था कि आसपास मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। मौके पर मौजूद स्वयंसेवकों और अन्य लोगों ने किसी तरह स्थिति को संभालने की कोशिश की।

घायल युवक को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। डॉक्टरों की टीम उसका इलाज कर रही है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

घटना के तुरंत बाद मंदिर प्रशासन ने एहतियातन उत्सव को कुछ समय के लिए रोक दिया। संबंधित हाथी को मंदिर परिसर के एक सुरक्षित हिस्से में बांध दिया गया, ताकि वह दोबारा किसी को नुकसान न पहुंचा सके। पशु विशेषज्ञों को भी बुलाया गया है, जो यह जांच कर रहे हैं कि हाथी अचानक आक्रामक क्यों हुआ।

विशेषर्जा का मानना है कि भीड़, तेज आवाज, रोशनी और लंबे समय तक खड़े रहने से हाथियों पर मानसिक दबाव बढ़ सकता है। मंदिर उत्सवों में पारंपरिक रूप से हाथियों का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इस तरह की घटनाएं समय-समय पर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती रही हैं।

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है। कई यूजर्स ने मंदिर आयोजनों में हाथियों के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि भीड़भाड़ और शोरगुल के बीच इन जानवरों पर तनाव बढ़ जाता है, जिसका परिणाम कभी-कभी ऐसे हादसों के रूप में सामने आता है।

फिलहाल प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जाएगी और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए अतिरिक्त सावधानियां बरती जाएंगी। यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में भी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

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