Explained: ट्विशा डेथ केस में बड़ा झटका, सास की जमानत रद्द

Updated on 2026-05-28T13:27:57+05:30

Explained: ट्विशा डेथ केस में बड़ा झटका, सास की जमानत रद्द

Explained: ट्विशा डेथ केस में बड़ा झटका, सास की जमानत रद्द

Twisha Sharma Case Bhopal:भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा डेथ केस में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा और सख्त फैसला सुनाते हुए आरोपी सास और रिटायर्ड ज्यूडिशियल ऑफिसर गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी है. कोर्ट ने साफ कहा कि ट्रायल कोर्ट ने WhatsApp चैट्स, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, गवाहों के बयान और दहेज प्रताड़ना जैसे गंभीर आरोपों को पर्याप्त गंभीरता से नहीं देखा.

जस्टिस देवनारायण मिश्रा की बेंच ने माना कि केस डायरी में मौजूद सबूत प्रथम दृष्टया बेहद गंभीर हैं. कोर्ट के मुताबिक, ट्विशा की मौत शादी के कुछ ही महीनों बाद संदिग्ध परिस्थितियों में हुई और पोस्टमार्टम में फांसी के अलावा शरीर पर छह चोटों के निशान भी मिले. AIIMS की रिपोर्ट में साफ कहा गया कि ये चोटें शव उतारने या अस्पताल ले जाने के दौरान नहीं लगी थीं.

हाईकोर्ट में मध्यप्रदेश सरकार, CBI और मृतका के पिता नवनीधि शर्मा की ओर से ट्रायल कोर्ट के जमानत आदेश को चुनौती दी गई थी. सुनवाई के दौरान CBI ने दावा किया कि शादी के बाद ट्विशा पर गर्भपात का दबाव बनाया गया, उसके चरित्र पर सवाल उठाए गए और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया. कोर्ट में पेश WhatsApp चैट्स में ट्विशा ने खुद को “बुरी तरह फंसा हुआ” बताया था और परिवार से उसे मायके ले जाने की गुहार लगाई थी.

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कोर्ट में कहा कि ट्विशा लगातार अपने परिवार को ससुराल में हो रही प्रताड़ना के बारे में बता रही थी. वहीं CBI ने आरोप लगाया कि CCTV फुटेज से छेड़छाड़ की गई, चुनिंदा क्लिप सोशल मीडिया में लीक की गईं और जांच में भी पूरा सहयोग नहीं किया गया.

बचाव पक्ष ने दलील दी कि ट्विशा ने आत्महत्या की थी और जमानत रद्द करने जैसी असाधारण परिस्थितियां मौजूद नहीं हैं. हालांकि हाईकोर्ट ने माना कि ट्रायल कोर्ट ने केवल बचाव पक्ष की दलीलों पर भरोसा किया और केस डायरी के महत्वपूर्ण तथ्यों, गवाहों के बयानों और डिजिटल सबूतों की अनदेखी की.

अदालत ने कहा कि आरोपी प्रभावशाली हैं, जांच अभी शुरुआती चरण में है और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने यह भी माना कि दहेज प्रताड़ना, मानसिक उत्पीड़न और गर्भपात के दबाव से जुड़े आरोप बेहद गंभीर प्रकृति के हैं. इन्हीं आधारों पर भोपाल की 10वीं अतिरिक्त सत्र अदालत द्वारा 15 मई 2026 को दी गई अग्रिम जमानत रद्द कर दी गई.

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