J-K विधानसभा में ऐतिहासिक बिल पारित, जानें पूरा राजनीतिक घटनाक्रम

Updated on 2026-04-02T11:25:56+05:30

J-K विधानसभा में ऐतिहासिक बिल पारित, जानें पूरा राजनीतिक घटनाक्रम

J-K विधानसभा में ऐतिहासिक बिल पारित, जानें पूरा राजनीतिक घटनाक्रम

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पहली बार सरकार ने एक प्राइवेट मेंबर बिल का समर्थन किया है, जिससे इतिहास रच गया है। इस बिल का नाम “जम्मू और कश्मीर भूमि अनुदान (बहाली और संरक्षण) विधेयक, 2025” है। इसका उद्देश्य 1960 के भूमि अनुदान अधिनियम और उसके नियमों को फिर से बहाल करना है। साल 2022 में उपराज्यपाल द्वारा किए गए संशोधन के बाद कई स्थानीय पट्टेदारों को सरकारी जमीन और होटलों से बेदखल होने का खतरा बढ़ गया था। इसी नियम को चुनौती देने के तौर पर इस बिल को देखा जा रहा है। इसे नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक तनवीर सादिक ने पेश किया।

जब बिल सदन में पेश हुआ, तो मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इसकी अनुमति दी। विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने इसे ध्वनि मत के लिए रखा और NC के समर्थन से यह पारित हो गया, जबकि विपक्ष ने वोटिंग की मांग नहीं की।

हालांकि, इस बिल को लेकर राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। हंदवाड़ा से पीपल्स कॉन्फ्रेंस के विधायक सज्जाद गनी लोन ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कानून कुछ बड़े और प्रभावशाली लोगों को फायदा पहुंचा सकता है, जबकि गरीब और छोटे जमीन धारकों को इससे कोई खास लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने यह भी पूछा कि सरकारी जमीन और लीज से जुड़ा पूरा डेटा सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है।

वहीं बीजेपी विधायक और विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने भी इस बिल की आलोचना करते हुए इसे जनता के साथ विश्वासघात बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम सरकारी जमीन के कम दरों पर आवंटन का रास्ता खोल सकता है और जनता की संपत्ति के संरक्षण के खिलाफ है। एक अन्य बीजेपी विधायक रणबीर सिंह पठानिया ने इसे संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ बताया।

इस बिल का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि 2022 के नियमों के तहत समाप्त हो चुकी लीज का नवीनीकरण रोक दिया गया था और जमीन को बाजार दर पर नीलाम करने का प्रावधान किया गया था। अगर यह कानून पूरी तरह लागू होता है, तो मौजूदा पट्टेदारों को राहत मिल सकती है और लीज नवीनीकरण की प्रक्रिया फिर से शुरू हो सकती है।

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