वास्तु के अनुसार कैसा हो आपका पूजाघर?

Updated on 2026-02-13T11:31:05+05:30

वास्तु के अनुसार कैसा हो आपका पूजाघर?

वास्तु के अनुसार कैसा हो आपका पूजाघर?

मंदिर या पूजा स्थान वो स्थान होता है,जहां से पूरे घर या कार्यालय और उसके सदस्यों को पॉजिटिविटी मिलती है।इस दृष्टि से वास्तु में मंदिर का अपना एक अलग और विशेष महत्व है।चलिए जानते हैं कैसा हो घर या कार्यकाल का मंदिर? किस दिशा में मंदिर होना, होगा आपके लिए लाभदायी? कैसे पा सकते है आप भी अपने घर या कार्यालय में सुख और शांति और उन्नति?

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर या कार्यालय में मंदिर (पूजाघर) हमेशा उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में होना चाहिए, जो सुख-समृद्धि के लिए सर्वोत्तम है। मंदिर के लिए पूर्व या उत्तर दिशा भी शुभ है। पूजा करते समय मुख पूर्व या उत्तर दिशा में रखें। लकड़ी का मंदिर उत्तम है, और इसे शौचालय/सीढ़ियों के पास नहीं होना चाहिए। 

वास्तु अनुसार घर के मंदिर के प्रमुख नियम:

दिशा: सबसे उत्तम दिशा ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) है।

मूर्तियों का मुख: भगवान की मूर्तियां पूर्व या पश्चिम में होनी चाहिए, ताकि पूजा करने वाले का मुख पूर्व या उत्तर की ओर हो।

मंदिर की सामग्री: लकड़ी का मंदिर सबसे शुभ माना जाता है, जो सौभाग्य लाता है।

मूर्तियां: मूर्तियां दीवार से सटाकर न रखें, उन्हें थोड़ी दूरी पर रखें। भगवान की मूर्ति की ऊंचाई इतनी हो कि उनके पैर और हमारा हृदय बराबर हो।

साफ-सफाई: मंदिर में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। सूखी माला या खंडित मूर्तियां न रखें।

क्या न करें: मंदिर के पास शौचालय या सीढ़ियों के नीचे मंदिर नहीं बनाना चाहिए।

दीया: पूजा के बाद दीया दक्षिण दिशा में रखना सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है। 

पूजाघर के लिए अन्य सुझाव:

मंदिर में हल्के रंगों जैसे सफेद, हल्का नीला या पीले रंगों का उपयोग करें।

रात में मंदिर में एक छोटा दीया अवश्य जलाएं। 

ऊर्जा नमन 

उमिका शर्मा 

(अंक ज्योतिष आचार्या, वास्तु एक्सपर्ट व एनर्जी हीलर) 

 यह भी पढ़े 

दैनिक अंक ज्योतिष: 13 February 2026 By Umika Sharma (Numerologist,Vastu Expert and Energy Healer)