बजट 2026 में भारत पड़ोसी देशों से कई गुना आगे
बजट 2026 में भारत पड़ोसी देशों से कई गुना आगे
वित्त वर्ष 2026 के लिए भारत के बजट को लेकर जब पड़ोसी देशों से तुलना की जाती है, तो आर्थिक अंतर साफ नजर आता है। बजट 2026 में भारत ने रक्षा, बुनियादी ढांचा, सामाजिक कल्याण और विकास योजनाओं पर बड़े पैमाने पर खर्च का प्रावधान किया है। इसके मुकाबले पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और अफगानिस्तान जैसे देशों के कुल सरकारी बजट का आकार भारत से काफी छोटा है।
सूत्रों के अनुसार, भारत का केंद्रीय बजट दुनिया के बड़े राष्ट्रीय बजटों में गिना जाता है। वहीं पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लगातार वित्तीय दबाव में रही है और उसका बजट सीमित संसाधनों पर आधारित माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय कर्ज और आईएमएफ कार्यक्रमों पर निर्भरता के कारण पाकिस्तान के लिए विकास खर्च की गुंजाइश कम बताई जाती है।
इस बीच, बांग्लादेश की स्थिति अपेक्षाकृत स्थिर मानी जाती है। हालांकि उसका बजट आकार भारत की तुलना में काफी कम है। बांग्लादेश का सरकारी खर्च मुख्य रूप से सामाजिक क्षेत्र, निर्यात आधारित उद्योग और बुनियादी ढांचे पर केंद्रित रहता है, लेकिन कुल बजटीय क्षमता भारत के सामने सीमित दिखाई देती है।
वहीं दूसरी ओर, नेपाल का बजट छोटे पैमाने का है और वह बड़े स्तर पर विदेशी सहायता और अनुदान पर निर्भर रहता है। नेपाल की आर्थिक प्राथमिकताएं बुनियादी सेवाओं, सड़क परियोजनाओं और ग्रामीण विकास तक सीमित मानी जाती हैं। भारत की तुलना में नेपाल का कुल बजट कई गुना छोटा बताया जा रहा है।
अफगानिस्तान की बात करें तो वहां की आर्थिक स्थिति सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण मानी जाती है। राजनीतिक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते अफगानिस्तान का सरकारी बजट बेहद सीमित है। प्रशासन का कहना है कि आवश्यक सेवाओं को चलाना ही वहां की सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का बड़ा बजट न केवल उसकी अर्थव्यवस्था के आकार को दर्शाता है, बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर उसकी नीतिगत और रणनीतिक क्षमता को भी दिखाता है। बजट 2026 के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि दक्षिण एशिया में आर्थिक शक्ति संतुलन भारत के पक्ष में बना हुआ है और आने वाले वर्षों में यह अंतर और बढ़ सकता है।
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