Last Updated Jan - 30 - 2026, 12:16 PM | Source : Fela News
Budget 2026 से पहले स्मार्टफोन की कीमतों को लेकर असमंजस है। AI डिवाइस की मांग, चिप्स की कमी और सरकारी फैसले तय करेंगे आगे का रुख ।
Budget 2026 नज़दीक आते ही आम लोगों के मन में एक बड़ा सवाल है कि क्या 1 फरवरी के बाद स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ जाएंगी। आज के समय में स्मार्टफोन सिर्फ एक गैजेट नहीं, बल्कि पढ़ाई, नौकरी, बैंकिंग और रोज़मर्रा की ज़रूरतों का अहम हिस्सा बन चुका है। ऐसे में कीमतों में थोड़ा सा बदलाव भी सीधे आम आदमी की जेब पर असर डालता है।
पिछले कुछ महीनों में स्मार्टफोन मार्केट में हलचल देखने को मिली है। जहां कई चीनी कंपनियों ने अपने फोन की कीमतें स्थिर रखी हैं, वहीं कुछ बड़े ब्रैंड्स ने चुनिंदा मॉडल्स की कीमतें बढ़ा दी हैं। इससे यह चिंता और गहरी हो गई है कि क्या Budget 2026 के बाद मोबाइल फोन और महंगे हो सकते हैं।
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि कीमतें बढ़ने के पीछे सबसे बड़ी वजह ग्लोबल लेवल पर मेमोरी चिप्स और सेमीकंडक्टर की कमी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मांग तेज़ी से बढ़ रही है। AI सर्वर, लैपटॉप और स्मार्ट डिवाइसेज़ के लिए ज्यादा पावरफुल चिप्स की जरूरत होती है, जिससे स्मार्टफोन इंडस्ट्री पर दबाव बढ़ गया है। इसका सीधा असर प्रोडक्शन कॉस्ट पर पड़ता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, कंपनियों के लिए अब लागत को संभालना मुश्किल हो रहा है। हालांकि, वे कीमतें अचानक बहुत ज्यादा बढ़ाने से बच रही हैं, क्योंकि ऐसा करने से ग्राहक दूसरी कंपनियों की ओर शिफ्ट हो सकते हैं। भारत जैसा प्राइस सेंसिटिव मार्केट कंपनियों को संतुलन बनाकर चलने के लिए मजबूर करता है।
रियलमी के पूर्व CEO और टेक इंडस्ट्री से जुड़े जानकार माधव सेठ का कहना है कि भारत का टेक सेक्टर इस समय एक अहम मोड़ पर खड़ा है। AI फीचर्स वाले स्मार्टफोन अब धीरे-धीरे आम सेगमेंट में भी आ रहे हैं, जिससे फोन पहले से ज्यादा महंगे हो रहे हैं। ऐसे में कीमतों को कंट्रोल करने के लिए सरकार की भूमिका बेहद अहम हो जाती है।
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि भारत को सिर्फ स्मार्टफोन असेंबल करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। कैमरा मॉड्यूल, बैटरी, प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) और दूसरे जरूरी पार्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग देश में ही होनी चाहिए। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और लागत घटाने में मदद मिलेगी।
Budget 2026 में अगर सरकार टारगेटेड टैक्स इंसेंटिव, कस्टम ड्यूटी में राहत और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाली नीतियां लाती है, तो स्मार्टफोन की कीमतों को स्थिर रखा जा सकता है। कुछ मामलों में कीमतों में हल्की गिरावट भी संभव है।
फिलहाल, ग्लोबल सप्लाई चेन पर दबाव के कारण तुरंत बड़ी कीमत कटौती की उम्मीद कम है। लेकिन 1 फरवरी के बाद सरकार जो दिशा तय करेगी, वही यह तय करेगी कि आने वाले महीनों में स्मार्टफोन आम लोगों के लिए महंगे होंगे या राहत भरे सस्ते ।
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