3 महीने बेवजह जेल में रखा, हाईकोर्ट ने यूपी सरकार पर ठोका जुर्माना!

Updated on 2026-05-04T11:38:22+05:30

3 महीने बेवजह जेल में रखा, हाईकोर्ट ने यूपी सरकार पर ठोका जुर्माना!

3 महीने बेवजह जेल में रखा, हाईकोर्ट ने यूपी सरकार पर ठोका जुर्माना!

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक युवक को बिना ठोस कारण तीन महीने जेल में रखने पर यूपी सरकार को जमकर फटकार लगाई है. अदालत ने इसे संविधान और मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन मानते हुए 10 लाख रुपये हर्जाना देने का आदेश दिया. कोर्ट ने साफ कहा कि किसी नागरिक की आजादी से ऐसा खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और जिम्मेदार अफसरों से यह रकम वसूली जा सकती है.

कोर्ट ने सरकार को लगाई कड़ी फटकार

जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि जब गृह विभाग के इतने बड़े अधिकारी ही अपने दायित्व को गंभीरता से नहीं ले रहे, तो बाकी अफसरों की कार्यशैली का अंदाजा लगाया जा सकता है.

 कोर्ट ने यह भी कहा कि गिरफ्तारी का लिखित कारण बताना संवैधानिक जिम्मेदारी है, इसे नजरअंदाज करना सीधे-सीधे मौलिक अधिकारों का हनन है.

10 लाख हर्जाना, अफसरों से होगी वसूली

हाईकोर्ट ने यूपी सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और कहा कि चाहें तो सरकार यह राशि संबंधित लापरवाह अधिकारियों से वसूल सकती है.

 अदालत ने माना कि युवक को बिना पर्याप्त कानूनी आधार बताए जेल में रखना बेहद गंभीर लापरवाही है.

क्या है पूरा मामला?

याची मनोज कुमार को 27 जनवरी 2026 को उन्नाव के असिवन थाने में दर्ज एक मामले में गिरफ्तार किया गया था.

 लेकिन गिरफ्तारी के बाद करीब तीन महीने तक न तो स्पष्ट आरोप तय किए गए और न ही हिरासत का ठोस कारण बताया गया.

 यही बात अदालत को सबसे ज्यादा आपत्तिजनक लगी.

कोर्ट ने दिए तुरंत रिहाई के आदेश

खंडपीठ ने मनोज कुमार की तत्काल रिहाई का आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि अगर वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं तो उन्हें तुरंत जेल से छोड़ा जाए.

 साथ ही अदालत ने दो टूक कहा कि बिना कारण लंबी हिरासत कानून के राज पर सवाल खड़ा करती है.

बड़ा संदेश: नागरिक की आजादी से खिलवाड़ नहीं

हाईकोर्ट के इस फैसले को प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा संदेश माना जा रहा है. अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि बिना लिखित कारण किसी को जेल में रखना सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि संविधान के खिलाफ कार्रवाई है. अब इस आदेश के बाद जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है

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