Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर ये गलती न करें, वरना सालभर परेशानी होगी

Updated on 2026-01-28T13:31:04+05:30

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर ये गलती न करें, वरना सालभर परेशानी होगी

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर ये गलती न करें, वरना सालभर परेशानी होगी

MahaShivratri 2026 Puja Niyam: महाशिवरात्रि पर भक्त भगवान शिव की पूजा करते हैं और रातभर भजन-कीर्तन करते हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से शिवजी की विशेष कृपा मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। हालांकि, व्रत और पूजा से जुड़े कुछ नियमों का पालन करना जरूरी होता है।

इस साल महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। निशिता काल की पूजा का समय 15 फरवरी रात 11:52 बजे से 16 फरवरी रात 12:42 बजे तक रहेगा।

शिवलिंग पर जल चढ़ाने के नियम

शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय भक्त को दक्षिण दिशा की ओर मुख करके खड़ा होना चाहिए। जल उत्तर दिशा से शिवलिंग पर गिरना चाहिए। जल चढ़ाने के तुरंत बाद परिक्रमा नहीं करनी चाहिए। माना जाता है कि इन नियमों से पूजा का पूरा फल मिलता है।

महाशिवरात्रि पर इन बातों का रखें ध्यान

पूजा के लिए कांसे के बर्तन का इस्तेमाल अशुभ माना जाता है। दूध या जल चढ़ाने के लिए सोना, चांदी या तांबे के बर्तन का प्रयोग करें। इस दिन काले कपड़े पहनने से बचें और सफेद, पीले, गुलाबी, नारंगी या हल्के रंग के वस्त्र पहनें।

अगर व्रत नहीं रख पा रहे हैं, तो भी मांस, शराब, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक भोजन से दूर रहें। मन को शुद्ध रखें और गलत विचारों से बचें। व्रत के दौरान अनाज की जगह फलाहार करें।

शिवजी को तुलसी के पत्ते, तिल, टूटे चावल और नारियल पानी अर्पित करना वर्जित माना गया है। वहीं, बिल्वपत्र चढ़ाने का विशेष महत्व होता है, लेकिन ध्यान रखें कि पत्ते टूटे हुए न हों और तीनों पत्तियां पूरी हों।

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