Metal Stocks Today: नाल्को से हिंदुस्तान जिंक तक मेटल स्टॉक्स में भारी बिकवाली, जानें वजह
Metal Stocks Today: नाल्को से हिंदुस्तान जिंक तक मेटल स्टॉक्स में भारी बिकवाली, जानें वजह
Metal Companies Share: आज, शुक्रवार 20 मार्च को मेटल कंपनियों के शेयरों पर नजर बनी रहेगी। NALCO Ltd, Vedanta Ltd और Hindustan Zinc Ltd जैसे प्रमुख मेटल स्टॉक्स निवेशकों के फोकस में होंगे। इसका मुख्य कारण ग्लोबल मार्केट में कमोडिटीज की कीमतों में गिरावट और अमेरिकी फेड रिजर्व के संकेतों से जुड़ी अनिश्चितता है। रात भर वैश्विक बाजारों में चांदी की कीमतें 6% तक गिर गईं, जबकि लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर एल्युमीनियम की कीमतें गुरुवार को 8% तक नीचे आ गईं
Vedanta का निवेश मुख्य रूप से एल्युमीनियम और चांदी में है, जबकि Hindustan Zinc भारत में चांदी का एकमात्र शुद्ध लिस्टेड स्टॉक है। जब मेटल की कीमतें गिरती हैं, तो इन कंपनियों का मुनाफा कम हो जाता है, जिससे शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ता है।
गिरावट के पीछे कई कारक हैं। सबसे बड़ा कारण चीन की धीमी मांग है। चीन दुनिया में मेटल का सबसे बड़ा उपभोक्ता है, लेकिन इसकी अर्थव्यवस्था में सुस्ती और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की धीमी रफ्तार के कारण लुनर ईयर के बाद भी मेटल की मांग उम्मीद से कम रही है। साल 2020 के बाद पहली बार एल्युमीनियम का स्टॉक 1.3 मिलियन टन के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। London Metal Exchange और अन्य वैश्विक गोदामों में यह एल्युमीनियम बिना बिका पड़ा है। इससे NALCO, Hindalco और Vedanta जैसे एल्युमीनियम उत्पादक कंपनियों के शेयरों पर दबाव बढ़ा है।
इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख जेरोम पॉवेल ने संकेत दिए हैं कि अगर महंगाई कम नहीं हुई तो 2026 में ब्याज दरों में और कटौती नहीं होगी। ऊंची ब्याज दरें मेटल की कीमतों के लिए नकारात्मक होती हैं क्योंकि इससे अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी हो जाती है और मेटल की खपत कम होती है।
डॉलर इंडेक्स के मजबूत होने का असर भी कमोडिटीज पर पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मेटल्स का कारोबार डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर मजबूत होने पर दूसरी करेंसी में खरीदारों के लिए मेटल महंगा हो जाता है। इसी वजह से चांदी की कीमतें भी गिर रही हैं, जिससे Hindustan Zinc और Vedanta के शेयरों पर असर दिख सकता है।
कुल मिलाकर आज मेटल स्टॉक्स निवेशकों की नजरों में रहेंगे, क्योंकि वैश्विक बाजार की गिरावट, ब्याज दरों की अनिश्चितता और डॉलर की मजबूती ने मेटल शेयरों पर दबाव बढ़ा दिया है।
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