महाराष्ट्र में OBC बहुजन आघाडी की एंट्री, समीकरण बदले

Updated on 2026-01-19T13:59:32+05:30

महाराष्ट्र में OBC बहुजन आघाडी की एंट्री, समीकरण बदले

महाराष्ट्र में OBC बहुजन आघाडी की एंट्री, समीकरण बदले

महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है. आगामी जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों से पहले OBC बहुजन आघाडी नाम के एक नए सियासी दल ने चुनावी मैदान में उतरने का ऐलान किया है. इस घोषणा के साथ ही राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि यह पार्टी सीधे तौर पर OBC आरक्षण के मुद्दे को लेकर सामने आई है.

पूर्व विधायक प्रकाश शेंडगे ने रविवार को साफ शब्दों में कहा कि उनकी पार्टी महाराष्ट्र में OBC आरक्षण की रक्षा के लिए हर स्तर पर चुनाव लड़ेगी और अपने उम्मीदवार उतारेगी. उन्होंने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले तीन-चार वर्षों में सुनियोजित तरीके से OBC आरक्षण को कमजोर किया गया है.

शेंडगे का आरोप है कि हालिया निकाय चुनावों में बड़े पैमाने पर फर्जी कुनबी प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल हुआ, जिसके जरिए मराठा, पाटिल और देशमुख समुदाय से जुड़े उम्मीदवारों ने OBC कोटे की सीटों पर कब्जा कर लिया. उन्होंने दावा किया कि OBC के लिए निर्धारित 27 प्रतिशत आरक्षण का लगभग पूरा हिस्सा अन्य वर्गों द्वारा हथिया लिया गया.

उन्होंने तीखा सवाल उठाया कि जब संविधान ने OBC को 27 प्रतिशत आरक्षण की गारंटी दी है तो वह जमीन पर दिखाई क्यों नहीं दे रहा. उनके अनुसार यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि राजनीतिक स्तर पर की गई बड़ी साजिश है. इसी मुद्दे को आधार बनाकर शेंडगे ने OBC बहुजन आघाडी के गठन की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि वर्षों तक OBC कार्यकर्ताओं को सिर्फ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया गया, लेकिन टिकट देने के समय उन्हें दरकिनार कर दिया जाता रहा. अब यह सिलसिला खत्म होगा.

उन्होंने बेहद आक्रामक अंदाज में कहा कि उनकी पार्टी "टिकट फैक्टरी" की तरह काम करेगी. जो भी योग्य और इच्छुक OBC उम्मीदवार होगा, उसे सीधे पार्टी की ओर से चुनाव लड़ने का मौका दिया जाएगा. इसके लिए एबी फॉर्म घर तक पहुंचाने की बात भी उन्होंने कही.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि OBC बहुजन आघाडी की एंट्री से महायुति और महाविकास आघाडी दोनों के वोट बैंक पर असर पड़ सकता है. महाराष्ट्र में OBC आबादी काफी बड़ी है और अगर यह पार्टी जमीनी स्तर पर समर्थन जुटाने में सफल रही तो कई जिलों में मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है.

खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में, जहां जिला परिषद चुनाव स्थानीय जातीय समीकरणों पर निर्भर करते हैं, वहां यह नई पार्टी बड़ी भूमिका निभा सकती है. फिलहाल शेंडगे के इस ऐलान ने साफ कर दिया है कि आने वाले चुनावों में OBC राजनीति एक बड़ा और निर्णायक फैक्टर बनने जा रही है.

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