AR Rahman विवाद पर सियासत तेज, सपा ने सरकार पर साधा निशाना
AR Rahman विवाद पर सियासत तेज, सपा ने सरकार पर साधा निशाना
बॉलीवुड के मशहूर संगीतकार ए. आर. रहमान के एक बयान ने अब सियासी रंग ले लिया है। हाल ही में एक इंटरव्यू में एआर रहमान ने कहा था कि बीते आठ-दस वर्षों में उन्हें उतना काम नहीं मिला, जितना उनकी क्षमता और अनुभव के हिसाब से मिलना चाहिए था। इस बयान को लेकर अब राजनीति तेज हो गई है और अलग-अलग दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।
एआर रहमान के समर्थन में समाजवादी पार्टी खुलकर सामने आई है। पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन ने उनके बयान से सहमति जताते हुए कहा कि आज के दौर में साफ जमीर और अच्छे स्वभाव वाले लोगों को काम मिलना मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने इसके लिए देश के मौजूदा माहौल और सरकार की सोच को जिम्मेदार ठहराया।
रामजीलाल सुमन ने कहा कि मौजूदा समय में सांप्रदायिक सोच हावी है और इसी वजह से समाज के हर क्षेत्र में इसका असर दिख रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्म इंडस्ट्री भी इससे अछूती नहीं है। सपा सांसद के मुताबिक, आज ऐसे लोगों को तरजीह दी जा रही है जो समाज में नफरत और विभाजन को बढ़ावा देते हैं, जबकि सकारात्मक सोच और भाईचारे की बात करने वाले कलाकारों को पीछे किया जा रहा है।
सपा नेता ने यह भी कहा कि एआर रहमान जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले कलाकार का यह कहना कि उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे, अपने आप में गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने इसे केवल एक कलाकार की निजी पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे रचनात्मक वर्ग की समस्या बताया।
इस मुद्दे पर AIMIM ने भी एआर रहमान के बयान का समर्थन किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि मौजूदा माहौल में कई कलाकार खुद को हाशिये पर महसूस कर रहे हैं और यह चिंता का विषय है। दूसरी ओर, BJP ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि फिल्म इंडस्ट्री में काम योग्यता और बाजार की मांग के आधार पर मिलता है, न कि किसी राजनीतिक या सांप्रदायिक सोच के तहत ।
फिलहाल, एआर रहमान के एक बयान से शुरू हुआ यह मामला अब राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बयानबाजी होने की संभावना है, जिससे यह साफ है कि कला, संस्कृति और राजनीति का यह टकराव जल्द थमने वाला नहीं है।
यह भी पढ़ें: