Share Market: शेयर बाजार में हाहाकार! 700 अंक टूटा सेंसेक्स, निफ्टी लुढ़का

Updated on 2026-06-03T13:51:45+05:30

Share Market: शेयर बाजार में हाहाकार! 700 अंक टूटा सेंसेक्स, निफ्टी लुढ़का

Share Market: शेयर बाजार में हाहाकार! 700 अंक टूटा सेंसेक्स, निफ्टी लुढ़का

 

Share Market Today on June 3: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 700 अंक से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 23,300 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, महंगे कच्चे तेल और विदेशी निवेशकों की सतर्कता ने बाजार का मूड पूरी तरह बिगाड़ दिया।

शुरुआती कारोबार से ही दबाव में रहा बाजार

बाजार ने दिन की शुरुआत ही कमजोरी के साथ की थी। सेंसेक्स करीब 142 अंकों की गिरावट के साथ खुला, लेकिन जैसे-जैसे कारोबार आगे बढ़ा, बिकवाली तेज होती गई। दोपहर तक सेंसेक्स 726 अंकों से ज्यादा लुढ़ककर 73,923 के आसपास पहुंच गया। वहीं निफ्टी भी करीब 190 अंक टूटकर 23,285 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया।

निवेशकों के बीच बढ़ती अनिश्चितता और वैश्विक घटनाक्रमों ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया है।

अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी बाजार की बेचैनी

बाजार पर सबसे बड़ा दबाव पश्चिम एशिया से आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और उसके जवाब में ईरान की ओर से मिसाइल एवं ड्रोन हमलों की खबरों ने वैश्विक बाजारों में जोखिम की भावना को बढ़ा दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ता है तो इसका असर ऊर्जा कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था दोनों पर पड़ सकता है।

महंगा हुआ कच्चा तेल, बढ़ी चिंता

भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दिया। ब्रेंट क्रूड 97 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड भी 95 डॉलर के आसपास कारोबार करता नजर आया।

भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह चिंता की बात है, क्योंकि महंगा तेल महंगाई बढ़ा सकता है और कंपनियों की लागत पर भी असर डाल सकता है।

एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख

एशियाई बाजारों में तस्वीर अलग-अलग रही। जापान का निक्केई इंडेक्स रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया और निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया। दूसरी तरफ हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स दबाव में दिखाई दिया और गिरावट के साथ कारोबार करता रहा।

इससे साफ है कि वैश्विक निवेशक अभी भी अलग-अलग बाजारों में अलग रणनीति अपना रहे हैं।

अमेरिकी बाजारों में रही मजबूती

दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी शेयर बाजार पिछले कारोबारी सत्र में रिकॉर्ड स्तरों पर बंद हुए थे। डॉव जोन्स, S&P 500 और नैस्डैक तीनों इंडेक्स नई ऊंचाइयों पर पहुंचे। हालांकि भारतीय बाजारों ने इस सकारात्मक संकेत को नजरअंदाज करते हुए भू-राजनीतिक जोखिमों पर ज्यादा ध्यान दिया।

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अमेरिका-ईरान तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में राहत नहीं मिलती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे माहौल में निवेशकों को घबराकर फैसले लेने के बजाय मजबूत कंपनियों और लंबी अवधि की रणनीति पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।

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