सिंघवी बोले: चुनाव बहाने से विधायी काम नहीं कर सकता EC

Updated on 2025-11-28T13:11:35+05:30

सिंघवी बोले: चुनाव बहाने से विधायी काम नहीं कर सकता EC

सिंघवी बोले: चुनाव बहाने से विधायी काम नहीं कर सकता EC

सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार (27 नवंबर 2025) को वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि चुनाव आयोग चुनाव कराने के नाम पर संसद और विधानसभा के असली विधायी अधिकार अपने हाथ में नहीं ले सकता। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच कई राज्यों में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की जांच कर रही है। याचिकाकर्ताओं की ओर से सिंघवी और कपिल सिब्बल ने कहा कि चुनाव आयोग अपनी संवैधानिक सीमाएं पार कर रहा है और लोगों पर बेवजह दस्तावेज़ों का बोझ डाल रहा है।

सिंघवी ने कहा कि चुनाव आयोग संविधान का “तीसरा सदन” नहीं है और उसे अपने हिसाब से कानून बनाने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 324 (चुनावों का प्रबंधन) को अनुच्छेद 327 के साथ मिलकर समझना चाहिए, जिसमें चुनाव संबंधी कानून बनाने का अधिकार सिर्फ संसद को दिया गया है।

सिंघवी ने जून 2025 में जारी किए गए एक फॉर्म पर आपत्ति जताई, जिसमें पहचान की पुष्टि के लिए 11–12 दस्तावेज़ मांगे गए थे। उन्होंने पूछा—“ये किस कानून में लिखा है?”

कपिल सिब्बल ने भी बीएलओ (Booth Level Officer) की शक्तियों पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा—“क्या एक स्कूल टीचर, जिसे बीएलओ बनाया गया है, यह तय कर सकता है कि कोई व्यक्ति मानसिक रूप से असमर्थ है या नहीं?”

उन्होंने यह भी कहा कि नागरिकता साबित करने की ज़िम्मेदारी नागरिक पर डालना खतरनाक है। उन्होंने उदाहरण दिया—अगर किसी के पिता ने 2003 में वोट नहीं डाला या उनकी पहले मृत्यु हो गई, तो कोई नागरिक अपनी नागरिकता कैसे साबित करेगा?

इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा—“अगर आपके पिता का नाम सूची में नहीं है और आपने भी ध्यान नहीं दिया, तो हो सकता है आपसे चूक हो गई हो।” सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की सुनवाई 2 दिसंबर को फिर शुरू करेगी। 

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