Deepfake पर सख्ती, 3 घंटे में हटेगा भ्रामक AI कंटेंट

Updated on 2026-02-11T15:00:38+05:30

Deepfake पर सख्ती, 3 घंटे में हटेगा भ्रामक AI कंटेंट

Deepfake पर सख्ती, 3 घंटे में हटेगा भ्रामक AI कंटेंट

डिजिटल दुनिया में तेजी से बढ़ रहे डीपफेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित फर्जी कंटेंट पर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 में संशोधन करते हुए केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि अब सोशल मीडिया कंपनियों को अदालत के निर्देश मिलने के तीन घंटे के भीतर भ्रामक या बनावटी एआई कंटेंट हटाना होगा. ये नए नियम 20 फरवरी 2026 से लागू होंगे. 

सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब डीपफेक वीडियो और एआई से तैयार की गई झूठी तस्वीरें समाज, राजनीति और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा पर गंभीर असर डाल रही हैं. कई मामलों में मशहूर हस्तियों, नेताओं और आम नागरिकों के नाम पर फर्जी वीडियो वायरल हुए, जिससे भ्रम और विवाद की स्थिति बनी. ऐसे में सरकार ने प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करने का फैसला किया है. 

नए नियमों के तहत सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज - जैसे माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X, इंस्टाग्राम और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म को अदालत या सक्षम प्राधिकरण के आदेश के बाद अधिकतम तीन घंटे के भीतर संबंधित कंटेंट हटाना अनिवार्य होगा. अगर प्लेटफॉर्म ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. 

सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि एआई द्वारा तैयार की गई सामग्री को अब आईटी नियमों के तहत अन्य सूचनाओं की तरह ही माना जाएगा. यानी यदि कोई एआई कंटेंट भ्रामक, अवैध या नुकसानदायक पाया जाता है, तो उस पर वही कानूनी प्रावधान लागू होंगे जो सामान्य डिजिटल कंटेंट पर लागू होते हैं. 

सरकार ने एआई कंटेंट की अनिवार्य लेबलिंग भी जरूरी कर दी है. इसका मतलब है कि यदि कोई सामग्री एआई की मदद से तैयार की गई है, तो उसे स्पष्ट और प्रमुख रूप से चिह्नित करना होगा. जहां तकनीकी रूप से संभव हो, वहां ऐसे कंटेंट को स्थायी मेटाडेटा या पहचान चिह्नों के साथ जोड़ा जाएगा, ताकि उसकी पहचान भविष्य में भी बनी रहे. इसके अलावा, एक बार लेबल लगाए जाने के बाद प्लेटफॉर्म उसे हटाने या छिपाने की अनुमति नहीं देंगे. 

हालांकि, सरकार ने कुछ गतिविधियों को इस दायरे से बाहर रखा है. सामान्य फोटो एडिटिंग, डिजाइन सुधार या शैक्षिक उद्देश्यों से की गई रचनात्मक गतिविधियां इन सख्त प्रावधानों के तहत नहीं आएंगी, बशर्ते उनका दुरुपयोग न हो. 

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल पारदर्शिता और जिम्मेदारी की दिशा में महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर काफी कुछ निर्भर करेगा. तकनीकी स्तर पर एआई कंटेंट की पहचान और उसकी निगरानी एक चुनौती बनी रहेगी. 

कुल मिलाकर, सरकार का यह फैसला डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को स्पष्ट संदेश देता है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ जवाबदेही भी जरूरी है. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि नए नियम डीपफेक और फर्जी एआई कंटेंट पर कितना प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर पाते हैं. 

यह भी पढ़े 

Samsung Galaxy S26 Ultra लॉन्च डेट लीक, फीचर्स ने मचाया तहलका