कड़कड़ाती ठंड में याददाश्त खो देता है यह जीव, गर्मी में सब याद

Updated on 2026-01-29T17:56:38+05:30

कड़कड़ाती ठंड में याददाश्त खो देता है यह जीव, गर्मी में सब याद

कड़कड़ाती ठंड में याददाश्त खो देता है यह जीव, गर्मी में सब याद

दुनिया अजीबो-गरीब जीवों से भरी हुई है, लेकिन कुछ जीव ऐसे होते हैं जिनकी खासियतें इंसानों को हैरान कर देती हैं। ऐसा ही एक अनोखा जीव है, जो कड़कड़ाती ठंड में अपनी याददाश्त खो देता है और गर्मी आते ही उसे सब कुछ फिर से याद आ जाता है। आसान शब्दों में कहें तो यह जीव ठंड के मौसम में बिल्कुल “गजनी” बन जाता है। 

इस अनोखे जीव का नाम आर्कटिक ग्राउंड स्क्विरल है। यह छोटा-सा जानवर अलास्का और साइबेरिया जैसे बेहद ठंडे इलाकों में पाया जाता है, जहां सर्दियों में तापमान माइनस 30 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे चला जाता है। इतनी भीषण ठंड में जहां इंसान कुछ मिनट भी नहीं टिक सकता, वहीं यह जीव महीनों तक आराम से जीवित रहता है। 

सर्दियों के शुरू होते ही आर्कटिक ग्राउंड स्क्विरल हाइबरनेशन यानी गहरी नींद में चला जाता है। यह नींद कुछ दिनों या हफ्तों की नहीं, बल्कि करीब 7 से 8 महीनों तक चलती है। इस दौरान इसका शरीर लगभग निष्क्रिय हो जाता है। शरीर का तापमान बेहद कम हो जाता है और दिल की धड़कन भी बहुत धीमी पड़ जाती है। जहां सामान्य समय में इसकी धड़कन 200 बार प्रति मिनट होती है, वहीं हाइबरनेशन के दौरान यह घटकर सिर्फ 1 से 5 बार प्रति मिनट रह जाती है। 

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी ठंड और कम ऑक्सीजन के कारण इसके दिमाग के न्यूरॉन्स यानी ब्रेन सेल्स के बीच के कनेक्शन टूट जाते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस स्थिति में इसका दिमाग लगभग बंद हो जाता है और यह जीव अपनी याददाश्त खो बैठता है। उसे यह भी याद नहीं रहता कि उसने खाना कहां छिपाया था या उसके आसपास कौन रहता है। 

आमतौर पर इंसानों में अगर इतनी कम ऑक्सीजन पहुंचे या दिमाग इतने लंबे समय तक निष्क्रिय रहे, तो ब्रेन डैमेज या ब्रेन डेड जैसी स्थिति हो सकती है। लेकिन यह जीव बिल्कुल अलग तरह से काम करता है। 

जैसे ही सर्दियां खत्म होती हैं और वसंत का मौसम आता है, आर्कटिक ग्राउंड स्क्विरल धीरे-धीरे नींद से जागने लगता है। जागने के कुछ ही घंटों के अंदर इसके दिमाग के टूटे हुए न्यूरॉन कनेक्शन फिर से जुड़ जाते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि इसकी याददाश्त भी पूरी तरह वापस आ जाती है। इसे फिर से याद आने लगता है कि उसका खाना कहां है, उसका इलाका कौन-सा है और उसका साथी कौन है। 

यही वजह है कि वैज्ञानिक इस जीव पर गहराई से शोध कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह समझ आ जाए कि यह जीव अपने दिमाग को खुद कैसे ठीक कर लेता है, तो भविष्य में इंसानों के लिए भी इसका फायदा हो सकता है। खासकर अल्जाइमर, स्ट्रोक और ब्रेन इंजरी जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में यह रिसर्च बेहद मददगार साबित हो सकती है। 

कुल मिलाकर, आर्कटिक ग्राउंड स्क्विरल प्रकृति का एक ऐसा चमत्कार है, जो यह दिखाता है कि कुदरत के पास आज भी इंसान से कहीं ज्यादा रहस्य छिपे हुए हैं। 

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