मार्क कार्नी के बयान पर भड़के ट्रंप, कनाडा से छीना बोर्ड ऑफ पीस न्योता
मार्क कार्नी के बयान पर भड़के ट्रंप, कनाडा से छीना बोर्ड ऑफ पीस न्योता
स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से घोषित किए गए 'बोर्ड ऑफ पीस' को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। इस विवाद की वजह बने हैं कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, जिनके एक बयान के बाद ट्रंप ने कनाडा को भेजा गया बोर्ड ऑफ पीस का निमंत्रण वापस ले लिया।
दरअसल, ट्रंप ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मंच से 'बोर्ड ऑफ पीस' के गठन का ऐलान किया था। इस बोर्ड का उद्देश्य वैश्विक संघर्षों को सुलझाना, युद्धग्रस्त इलाकों में स्थिरता लाना और पुनर्निर्माण कार्यों में सहयोग करना बताया गया । शुरुआती चरण में अमेरिका ने करीब 50 देशों को इसमें शामिल होने का निमंत्रण भेजा था, जिनमें कनाडा भी शामिल था।
हालांकि, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया आने से पहले ही ट्रंप ने यह न्योता वापस लेने का ऐलान कर दिया। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट करते हुए लिखा कि बोर्ड ऑफ पीस दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित वैश्विक नेतृत्व मंच होगा, लेकिन कनाडा को इसमें शामिल करने का न्योता अब वापस लिया जा रहा है।
इस फैसले के पीछे कार्नी का दावोस में दिया गया भाषण अहम माना जा रहा है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए कार्नी ने 'मध्यम शक्तियों' से महाशक्तियों की दबाव वाली नीतियों के खिलाफ एकजुट होने की अपील की थी। उन्होंने बिना किसी देश का नाम लिए टैरिफ, सप्लाई चेन और आर्थिक दबाव को जबरदस्ती के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की आलोचना की थी। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यह टिप्पणी सीधे तौर पर ट्रंप की विदेश नीति की ओर इशारा थी।
कार्नी ने अपने भाषण में कहा था कि नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था अब केवल एक भ्रम बनकर रह गई है और शक्तिशाली देश अपने हितों के लिए आर्थिक एकीकरण को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी बयान को ट्रंप प्रशासन ने अपने खिलाफ माना और इसके तुरंत बाद कनाडा को बोर्ड ऑफ पीस से बाहर करने का फैसला लिया गया।
इस बीच, बोर्ड ऑफ पीस को लेकर अन्य देशों की स्थिति भी सामने आ रही है। व्हाइट हाउस के सूत्रों के अनुसार अब तक करीब 35 देशों ने बोर्ड में शामिल होने की सहमति दे दी है। इनमें इजरायल, सऊदी अरब, मिस्र, तुर्की और कतर जैसे पश्चिम एशिया के प्रमुख देश शामिल हैं। हालांकि अमेरिका के पारंपरिक यूरोपीय सहयोगी इस पहल से फिलहाल दूरी बनाए हुए हैं, खासकर बोर्ड की सदस्यता फीस को लेकर ।
ड्राफ्ट प्रस्ताव के मुताबिक, बोर्ड की स्थायी सदस्यता के लिए किसी भी देश को कम से कम एक अरब अमेरिकी डॉलर का योगदान देना होगा। यही नहीं, माना जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप इस बोर्ड के आजीवन अध्यक्ष हो सकते हैं, जबकि अन्य सदस्यों का कार्यकाल सीमित रहेगा।
कनाडा का न्योता वापस लिया जाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि 'बोर्ड ऑफ पीस' केवल शांति का मंच नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति में शक्ति संतुलन और नेतृत्व को लेकर एक नया अखाड़ा भी बन सकता है।
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