Last Updated Jan - 22 - 2026, 04:59 PM | Source : Fela News
अमेरिका में संभावित टैरिफ नीति बदलावों को लेकर भारत समेत उभरती अर्थव्यवस्थाओं की चिंता बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की वरिष्ठ अधिकारी गीता गोपीनाथ ने कहा
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संभावित टैरिफ नीति को लेकर एक बार फिर वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता के संकेत मिल रहे हैं। इसी बीच, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रथम उप प्रबंध निदेशक गीता गोपीनाथ ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका टैरिफ बढ़ाने जैसे कदम उठाता है, तो इसका असर भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की विकास दर पर पड़ सकता है।
सूत्रों के अनुसार, गीता गोपीनाथ ने विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान कहा कि वैश्विक व्यापार आपस में गहराई से जुड़ा हुआ है। ऐसे में किसी भी बड़े देश द्वारा टैरिफ या व्यापार प्रतिबंध बढ़ाने से सप्लाई चेन बाधित होती है, निवेश का माहौल कमजोर पड़ता है और इसका असर अंततः विकास दर पर दिखता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बुनियाद पर खड़ी है, लेकिन वह वैश्विक परिस्थितियों से पूरी तरह अछूती नहीं रह सकती।
बताया जा रहा है कि ट्रंप ने अपने बयानों में अमेरिका के हितों की रक्षा के लिए आयात पर टैरिफ बढ़ाने की बात कही है। इससे पहले उनके कार्यकाल के दौरान भी भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में तनाव देखने को मिला था। उस समय कुछ भारतीय उत्पादों पर शुल्क बढ़ाया गया था, जबकि भारत ने भी जवाबी कदम उठाए थे।
वहीं दूसरी ओर, गीता गोपीनाथ ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की घरेलू मांग, सार्वजनिक निवेश और सुधारात्मक नीतियां उसे अन्य देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में रखती हैं। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि यदि वैश्विक स्तर पर व्यापार तनाव बढ़ता है, तो निर्यात, पूंजी प्रवाह और रोजगार सृजन पर दबाव आ सकता है।
इस बीच, आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की आईटी, फार्मा और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर अमेरिकी बाजार पर काफी हद तक निर्भर हैं। ऐसे में टैरिफ बढ़ने से इन क्षेत्रों में लागत और प्रतिस्पर्धा से जुड़े सवाल खड़े हो सकते हैं। सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या भारत को संभावित जोखिमों से निपटने के लिए वैकल्पिक बाजारों और घरेलू उत्पादन पर ज्यादा ध्यान देना होगा।
फिलहाल, भारत सरकार की ओर से ट्रंप के टैरिफ बयानों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में अमेरिका की वास्तविक नीति दिशा स्पष्ट होने के बाद ही इसके असर का सही आकलन किया जा सकेगा। तब तक वैश्विक बाजार और नीति निर्माता सतर्क नजर बनाए हुए हैं।
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