Vishwakarma Jayanti 2025: मशीनों का विश्राम दिवस: पूजा, महत्व और भंडारे का रहस्य

Updated on 2025-09-17T12:28:18+05:30

Vishwakarma Jayanti 2025: मशीनों का विश्राम दिवस: पूजा, महत्व और भंडारे का रहस्य

Vishwakarma Jayanti 2025: मशीनों का विश्राम दिवस: पूजा, महत्व और भंडारे का रहस्य

Vishwakarma Jayanti 2025: विश्वकर्मा जयंती 2025 बुधवार, 17 सितंबर को मनाई जाएगी। यह त्योहार भगवान विश्वकर्मा की जयंती के रूप में पूरे देश में मनाया जाता है।

भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का पहला शिल्पकार और देवताओं का वास्तुकार माना जाता है। मान्यता है कि उन्होंने इंद्रपुरी, द्वारका, हस्तिनापुर, लंका जैसी नगरी बनाई थी। साथ ही भगवान शिव का त्रिशूल और भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र भी उन्होंने ही बनाया। इसलिए उन्हें देव शिल्पकार कहा जाता है। ऋग्वेद, पुराण और महाभारत में भी उनका उल्लेख मिलता है।

विश्वकर्मा जयंती पर क्या होता है?

इस दिन कारखानों, फैक्ट्रियों, दफ्तरों और दुकानों में मशीनों और औजारों की पूजा की जाती है।

औजारों को साफ कर उन पर फूल, रोली और चावल चढ़ाए जाते हैं।

यज्ञ और हवन कर भगवान विश्वकर्मा से सुख-समृद्धि और सुरक्षा की प्रार्थना की जाती है।

कई जगह भंडारे और सामूहिक प्रसाद का आयोजन भी किया जाता है।

इस दिन काम क्यों नहीं होता?

माना जाता है कि विश्वकर्मा जयंती को मशीनों का विश्राम दिवस कहा जाता है। इस दिन औजारों और मशीनों को भगवान विश्वकर्मा को समर्पित कर केवल उनकी पूजा की जाती है।

भंडारे का महत्व

भंडारा आयोजित कर भगवान विश्वकर्मा की कृपा और आशीर्वाद सबके साथ बांटा जाता है। इससे समाज में एकता और भाईचारा बढ़ता है।

व्रत और पूजा

विश्वकर्मा जयंती पर व्रत रखना जरूरी नहीं है। लोग अपनी श्रद्धा अनुसार उपवास कर सकते हैं। मुख्य रूप से पूजा, औजारों की आराधना और भंडारे का महत्व है।

विश्वकर्मा मंदिर

भारत में बिहार, यूपी, राजस्थान, झारखंड, मध्य प्रदेश और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में भगवान विश्वकर्मा के मंदिर हैं।

यह पर्व खास क्यों?

इंजीनियर आर्टिजन, मैकेनिक, बढ़ई, लोहार और टेक्निकल फील्ड से जुड़े लोग भगवान विश्वकर्मा को अपना इष्ट मानते हैं। उनके लिए यह दिन सबसे खास और शुभ होता है।

निष्कर्ष

विश्वकर्मा जयंती सिर्फ धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह कर्म और मेहनत का सम्मान भी है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हर रचना, औजार और मशीन के पीछे किसी न किसी की कड़ी मेहनत होती है।