मोदी-मैक्रों मुलाकात में रक्षा सौदों पर टिकी दुनिया की नजर

Updated on 2026-02-17T15:32:17+05:30

मोदी-मैक्रों मुलाकात में रक्षा सौदों पर टिकी दुनिया की नजर

मोदी-मैक्रों मुलाकात में रक्षा सौदों पर टिकी दुनिया की नजर

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों तीन दिवसीय भारत यात्रा पर मुंबई पहुंच चुके हैं, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका स्वागत किया। रिपोर्ट के अनुसार यह यात्रा 17 से 19 फरवरी तक चलेगी और दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर विशेष फोकस रहेगा। यह मैक्रों की भारत की चौथी यात्रा बताई जा रही है।

बताया जा रहा है कि मैक्रों अपनी पत्नी ब्रिजित मैक्रों के साथ मुंबई पहुंचे, जहां महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनका स्वागत किया। कार्यक्रम के तहत वे मुंबई में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट में भाग लेंगे और इसके बाद दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता होगी। सूत्रों के मुताबिक इस दौरान व्यापार, उद्योग, डिजिटल क्षेत्र और सांस्कृतिक सहयोग पर भी चर्चा होगी।

रक्षा सहयोग इस मुलाकात का प्रमुख एजेंडा माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार राफेल लड़ाकू विमानों को लेकर आगे की संभावनाओं पर चर्चा हो सकती है, जिसमें अतिरिक्त खरीद, नए हथियारों का एकीकरण या अपग्रेड शामिल हो सकते हैं। भारत ने 2016 में फ्रांस से 36 राफेल विमानों की खरीद का समझौता किया था, जो वर्तमान में भारतीय वायुसेना में सेवा दे रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों पर भी बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 2005 में प्रोजेक्ट-75 के तहत छह पनडुब्बियों का सौदा हुआ था, जिनमें से पांच भारतीय नौसेना में शामिल हो चुकी हैं और छठी जल्द तैयार होने की बात कही जा रही है। अब प्रोजेक्ट-75 इंडिया के तहत आगे सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा संभव बताई जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक हैमर (HAMMER) एयर-टू-ग्राउंड मिसाइल के संयुक्त निर्माण का मुद्दा भी एजेंडे में शामिल है। यह मिसाइल राफेल से लॉन्च की जा सकती है और लंबी दूरी से सटीक हमला करने में सक्षम बताई जाती है। भारत में इसके संभावित संयुक्त उत्पादन पर भी बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है।

इसके अलावा हेलीकॉप्टरों के संयुक्त निर्माण पर भी चर्चा हो सकती है। फ्रांस की कंपनी एयरबस हेलीकॉप्टर्स भारत में निवेश कर ‘मेक इन इंडिया’ के तहत उत्पादन करना चाहती है। प्रशासन का कहना है कि इससे रक्षा क्षमता बढ़ने के साथ रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

इस बीच दोनों देशों के बीच AI, व्यापार, जलवायु और सांस्कृतिक सहयोग पर भी सहमति बनने की उम्मीद जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि इस मुलाकात के बाद कई महत्वपूर्ण घोषणाएं सामने आ सकती हैं

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