Ganga Dussehra 2026: 25 मई गंगा दशहरा: स्नान-दान का शुभ मुहूर्त, जरूर नोट करें

Updated on 2026-05-15T14:53:13+05:30

Ganga Dussehra 2026: 25 मई गंगा दशहरा: स्नान-दान का शुभ मुहूर्त, जरूर नोट करें

Ganga Dussehra 2026: 25 मई गंगा दशहरा: स्नान-दान का शुभ मुहूर्त, जरूर नोट करें

Ganga Dussehra 2026:हिंदू धर्म में गंगा दशहरा का विशेष महत्व माना जाता है. यह पर्व मां गंगा के धरती पर अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान, पूजा-पाठ और दान करने से पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. इस साल गंगा दशहरा 25 मई 2026, सोमवार को मनाया जाएगा. ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को पड़ने वाला यह पर्व धार्मिक दृष्टि से बेहद शुभ माना जाता है.

गंगा दशहरा 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 25 मई सुबह 4:30 बजे से शुरू होकर 26 मई सुबह 5:10 बजे तक रहेगी. उदया तिथि के आधार पर 25 मई को ही गंगा दशहरा मनाया जाएगा.

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:34 बजे से 5:18 बजे तक रहेगा, जिसे स्नान और पूजा के लिए सबसे शुभ माना गया है. वहीं अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:09 बजे से 1:02 बजे तक रहेगा. धार्मिक मान्यता है कि इस दौरान पूजा और दान करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है.

गंगा स्नान और दान का महत्व

गंगा दशहरा के दिन गंगा नदी या किसी पवित्र नदी में स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन स्नान करने से दस प्रकार के पाप समाप्त हो जाते हैं. जो लोग गंगा नदी तक नहीं पहुंच सकते, वे घर में पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं.

इस दिन अन्न, वस्त्र, जल, फल और धन का दान करना शुभ माना जाता है. जरूरतमंदों और गरीबों को भोजन कराना भी पुण्यदायी माना गया है. सुहागिन महिलाओं को श्रृंगार सामग्री दान करना और पशु-पक्षियों को दाना-पानी देना भी बेहद शुभ बताया गया है.

क्यों खास है गंगा दशहरा?

पौराणिक कथा के अनुसार राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए कठोर तपस्या की थी. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थीं. इसी कारण गंगा को भागीरथी भी कहा जाता है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गंगा दशहरा के दिन मां गंगा की पूजा करने से जीवन के दुख-दर्द दूर होते हैं और सुख-शांति का आशीर्वाद मिलता है. यही वजह है कि हर साल लाखों श्रद्धालु इस पर्व पर गंगा घाटों पर पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं.

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