Last Updated May - 07 - 2026, 12:59 PM | Source : Fela News
Extinguished Camphor Myth: सनातन धर्म में आरती और कपूर का विशेष महत्व है। कपूर शुद्धता का प्रतीक है। यदि आरती के दौरान यह बुझ जाए तो इसे अशुभ न मानें, दोबारा जलाकर पूजा पूरी करें।
Camphor in Puja: सनातन धर्म में पूजा-पाठ की हर परंपरा का गहरा आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व होता है। इनमें आरती को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि इसके बिना किसी भी पूजा को पूर्ण नहीं माना जाता। धूप, दीप और प्रसाद के बाद की जाने वाली आरती को ईश्वर की दिव्य उपस्थिति का प्रतीक कहा गया है।
आरती का आध्यात्मिक महत्व
मान्यताओं के अनुसार, आरती का प्रकाश अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाता है। यह मन में नकारात्मक विचारों को समाप्त कर सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है। इसलिए इसे केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक साधना का हिस्सा माना जाता है।
कपूर का विशेष प्रतीकात्मक अर्थ
आरती में उपयोग होने वाला कपूर विशेष महत्व रखता है। यह जलने के बाद पूरी तरह समाप्त हो जाता है और राख नहीं छोड़ता, जो अहंकार और सांसारिक इच्छाओं के त्याग का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह मनुष्य को ईश्वर में विलीन होने का संदेश देता है। वैज्ञानिक रूप से भी कपूर वातावरण को शुद्ध करने और कीटाणुओं को कम करने में सहायक माना जाता है।
आरती करने की परंपरागत विधि
आरती करते समय कपूर को जलाकर भगवान की मूर्ति के चरण, नाभि और मुख के पास घुमाया जाता है। इससे संपूर्ण मूर्ति को प्रकाश से अभिषेक किया जाता है। कई परंपराओं में इसे पूर्ण करने के लिए ‘एक आरती’ और ‘पंच आरती’ का विधान बताया गया है, जिसमें पंच आरती को पांच तत्वों का प्रतीक माना जाता है।
क्या कपूर बुझना अशुभ है?
अक्सर भक्तों के मन में यह शंका रहती है कि यदि आरती के दौरान कपूर बुझ जाए या गिर जाए तो यह अशुभ होता है। लेकिन धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टियों से यह केवल हवा, गुणवत्ता या तकनीकी कारणों से होता है, न कि किसी अपशगुन का संकेत।
घबराने की बजाय करें आरती पूर्ण
ऐसी स्थिति में घबराने की आवश्यकता नहीं है। श्रद्धापूर्वक कपूर को दोबारा जलाकर आरती को पूरा करना चाहिए। माना जाता है कि ईश्वर भाव और भक्ति देखते हैं, न कि छोटी-छोटी भौतिक घटनाएं।
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