Last Updated May - 06 - 2026, 01:28 PM | Source : Fela News
Krishna Janmashtami 2026: जन्माष्टमी का पर्व देश-विदेश में श्रद्धा और धूमधाम से मनाया जाता है. साल 2026 में यह 4 सितंबर को पड़ेगा. जानिए श्रीकृष्ण पूजा का शुभ मुहूर्त और पूरी महत्वपूर्ण जानकारी.
Janmashtami 2026: भगवान श्रीकृष्ण को हिंदू धर्म में सबसे प्रिय देवताओं में से एक माना जाता है. जन्माष्टमी का पर्व उनके जन्मोत्सव के रूप में पूरे देश और दुनिया में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.
जन्माष्टमी 2026 कब है?
नववर्ष में जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी. यह श्रीकृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव माना जा रहा है. यह पर्व केवल आस्था ही नहीं बल्कि प्रेम और भक्ति का भी प्रतीक है.
अष्टमी तिथि और पूजा का समय
भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर 2026 को सुबह 2:25 बजे शुरू होगी और 5 सितंबर को रात 12:13 बजे समाप्त होगी.
निशिता पूजा का समय रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक रहेगा, जो सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है.
रोहिणी नक्षत्र का समय
रोहिणी नक्षत्र 4 सितंबर 2026 को सुबह 12:29 बजे शुरू होकर दोपहर 11:04 बजे तक रहेगा. यह योग जन्माष्टमी पूजा को और अधिक शुभ बनाता है.
व्रत पारण का समय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पारण 5 सितंबर को सुबह 6:01 बजे के बाद किया जा सकता है. वहीं परंपरागत रूप से कुछ लोग देर रात 12:43 बजे के बाद भी व्रत खोलते हैं.
जन्माष्टमी व्रत नियम
इस व्रत में अन्न का सेवन वर्जित होता है. अगले दिन सूर्योदय के बाद निर्धारित समय पर व्रत तोड़ा जाता है. भक्त उपवास के दौरान केवल फलाहार या जल ग्रहण करते हैं.
जन्माष्टमी रात की पूजा विधि
रात 12 बजे श्रीकृष्ण का दूध, दही, शहद, घी और जल से अभिषेक किया जाता है. शंख और घंटियों की ध्वनि के साथ मंत्रोच्चार होता है. इसके बाद 56 भोग अर्पित कर बाल गोपाल को झूला झुलाया जाता है और “ॐ देवकीनन्दनाय” मंत्र का जाप किया जाता है.
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