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Chandra Grahan 2026: अगस्त में ब्लड मून चंद्र ग्रहण, साल का आखिरी मौका

Chandra Grahan 2026: अगस्त में ब्लड मून चंद्र ग्रहण, साल का आखिरी मौका

Last Updated May - 06 - 2026, 11:51 AM | Source : Fela News

Chandra Grahan 2026: सावन में साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण 27-28 अगस्त की रात लगेगा। यह आंशिक ग्रहण होगा, लेकिन भारत में दिन होने से दृश्य नहीं दिखेगा। चांद गहरा लाल दिखाई देगा।
अगस्त में ब्लड मून चंद्र ग्रहण
अगस्त में ब्लड मून चंद्र ग्रहण

Chandra Grahan 2026 Date and Time in India:साल 2026 में कुल चार ग्रहण लगने वाले हैं, जिनमें दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण शामिल हैं। साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को होली के दिन लग चुका है, जबकि अब दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण 27-28 अगस्त की दरमियानी रात को लगेगा। इस खगोलीय घटना को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

‘ब्लड मून’ का अद्भुत नजारा

 यह चंद्र ग्रहण भले ही आंशिक होगा, लेकिन इस दौरान चंद्रमा गहरे लाल रंग का दिखाई देगा, जिसे वैज्ञानिक भाषा में “ब्लड मून” कहा जाता है। बताया जा रहा है कि ग्रहण के दौरान पृथ्वी की छाया चंद्रमा के लगभग 93 प्रतिशत हिस्से को ढक लेगी, जिससे यह प्रभाव और भी स्पष्ट दिखाई देगा।

कैसे बनता है ब्लड मून?

 जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में आ जाते हैं, तब पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इस दौरान सूर्य की किरणें पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरते हुए मुड़ जाती हैं, जिससे चंद्रमा लाल रंग में दिखाई देता है। यही स्थिति ब्लड मून कहलाती है।

ग्रहण का समय और अवधि

 सावन पूर्णिमा पर लगने वाला यह चंद्र ग्रहण भारतीय समयानुसार सुबह 06:53 बजे शुरू होगा और दोपहर 12:32 बजे समाप्त होगा। इसकी कुल अवधि लगभग 5 घंटे 39 मिनट की होगी। हालांकि भारत में इस समय दिन होने के कारण यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा।

भारत में नहीं दिखेगा ग्रहण, सूतक काल भी अमान्य

 चूंकि यह आंशिक चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए सूतक काल भी मान्य नहीं रहेगा। सामान्यतः सूतक ग्रहण से 9 घंटे पहले शुरू होता है, जिसमें धार्मिक कार्य, पूजा-पाठ और अन्य शुभ कार्यों पर रोक लगती है। लेकिन इस बार भारत में इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

कहां-कहां दिखाई देगा यह चंद्र ग्रहण

 यह खगोलीय घटना भारत में भले ही नजर नहीं आएगी, लेकिन उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका के पश्चिमी हिस्सों और पूर्वी प्रशांत महासागर के क्षेत्रों में इसे साफ तौर पर देखा जा सकेगा।

खगोल प्रेमियों में उत्सुकता

 खगोलीय घटनाओं में रुचि रखने वाले लोग इस ब्लड मून को देखने के लिए बेहद उत्साहित हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार यह दृश्य पूर्ण चंद्र ग्रहण जैसा प्रभाव देगा और एक दुर्लभ खगोलीय अनुभव साबित होगा।

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