Mokshada Ekadashi 2025: व्रत से मिलता मोक्ष? जानें महत्व और मान्यता

Updated on 2025-11-22T15:38:44+05:30

Mokshada Ekadashi 2025: व्रत से मिलता मोक्ष? जानें महत्व और मान्यता

Mokshada Ekadashi 2025: व्रत से मिलता मोक्ष? जानें महत्व और मान्यता

Mokshada Ekadashi 2025:पंचांग के मुताबिक मोक्षदा एकादशी का पारण 02 दिसंबर 2025 को सुबह 07:00 से 09:05 बजे के बीच होगा। मान्यता है कि इसी दिन श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था, इसलिए इसे गीता जयंती भी कहा जाता है। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष का मार्ग खुलता है।

शास्त्रों में बताया गया है कि महाभारत के युद्ध में कुरुक्षेत्र में जिन योद्धाओं ने प्राण त्यागे थे, उन्हें मोक्ष प्राप्त हुआ था। इसी कारण इस एकादशी का महत्व और बढ़ जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से पापों का नाश होता है और जीवन में शांति आती है।

कहा जाता है कि उपवास करने से मन और शरीर दोनों शुद्ध होते हैं। इस दिन गीता पाठ करने और श्रीकृष्ण के उपदेशों को जीवन में अपनाने से भी लाभ मिलता है।

मोक्षदा एकादशी का महत्व

यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। माना जाता है कि इस दिन की गई पूजा, उपवास और भक्ति से पाप कम होते हैं और पुण्य मिलता है। भक्तजन पूरे दिन उपवास रखते हैं और रात में जप-ध्यान करते हैं। यह दिन आध्यात्मिक विकास और मानसिक शांति से जुड़ा माना जाता है।

मोक्षदा एकादशी व्रत के नियम

एकादशी शुरू होते ही व्रत का संकल्प लिया जाता है।

इसके बाद श्रीहरि विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है।

गीता पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है।

व्रत में फलाहार लिया जा सकता है।

अगले दिन द्वादशी तिथि में सही समय पर पारण करके व्रत पूरा होता है।

दशमी तिथि से तामसिक भोजन छोड़ देना चाहिए।

मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही यह व्रत रखा जाता है और इसी दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है।

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