108 खंभों वाला रहस्यमयी मंदिर, जहां सूर्य छूते हैं भगवान के चरण

Updated on 2026-05-21T16:36:21+05:30

108 खंभों वाला रहस्यमयी मंदिर, जहां सूर्य छूते हैं भगवान के चरण

108 खंभों वाला रहस्यमयी मंदिर, जहां सूर्य छूते हैं भगवान के चरण

भारत में मौजूद हजारों प्राचीन मंदिर अपनी रहस्यमयी कहानियों और दिव्य मान्यताओं के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं. इन्हीं में से एक है आंध्र प्रदेश के अन्नामय्या जिले के नंदलूर में स्थित भव्य सौम्यनाथ स्वामी मंदिर, जहां भगवान विष्णु “सौम्यनाथ स्वामी” के रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं. इस मंदिर की खासियत सिर्फ इसकी आस्था नहीं, बल्कि इसकी अद्भुत वास्तुकला और रहस्यमयी चमत्कार भी हैं.

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार ऋषि नारद के आग्रह पर भगवान विष्णु पृथ्वी की प्राकृतिक सुंदरता देखने निकले थे. जब वे चेयेरु नदी के किनारे इस स्थान पर पहुंचे तो यहां का शांत और सौम्य वातावरण देखकर मंत्रमुग्ध हो गए. तभी नारद जी ने भगवान से प्रार्थना की कि वे कलियुग में इसी स्थान पर निवास करें और भक्तों की रक्षा करें. कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने उनकी प्रार्थना स्वीकार कर यहां चट्टान के रूप में अवतार लिया. बाद में देवताओं ने इसी स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया.

इतिहास के अनुसार, समय के साथ मंदिर जर्जर हो गया था, लेकिन 11वीं शताब्दी में चोल राजा कुलुत्तुंगु ने इसका भव्य पुनर्निर्माण करवाया. बाद में काकतीय, पांड्य और विजयनगर शासकों ने भी मंदिर के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया. लगभग 10 एकड़ में फैला यह मंदिर पूरी तरह लाल पत्थरों से बना हुआ है और चार विशाल राजगोपुरमों से घिरा है.

मंदिर के 108 खूबसूरत खंभे इसकी सबसे बड़ी पहचान माने जाते हैं. इन खंभों पर भागवत कथाओं की अद्भुत नक्काशी की गई है, जो भक्तों और पर्यटकों को आकर्षित करती है. गर्भगृह में विराजमान भगवान सौम्यनाथ स्वामी की मूर्ति करीब 7 फीट ऊंची है और उनकी झलक तिरुमाला के भगवान वेंकटेश्वर स्वामी जैसी दिखाई देती है.

इस मंदिर का सबसे रहस्यमयी चमत्कार वह पल माना जाता है, जब विशेष दिनों में सूर्य की किरणें सीधे भगवान के चरणों को स्पर्श करती हैं. मान्यता है कि सच्चे मन से यहां प्रार्थना करने और नौ परिक्रमा लगाने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु 108 परिक्रमा भी लगाते हैं.

श्रावण मास, मुक्कोटी एकादशी और ब्रह्मोत्सव के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. आस्था, इतिहास और रहस्यमयी चमत्कारों से भरा यह मंदिर आज भी भक्तों के लिए अद्भुत आध्यात्मिक केंद्र बना हुआ है.

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