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Benefits of Tilak: तिलक लगाते समय कौन-सी उंगली सही? जानें धार्मिक महत्व और नियम

Benefits of Tilak: तिलक लगाते समय कौन-सी उंगली सही? जानें धार्मिक महत्व और नियम

Last Updated May - 20 - 2026, 04:30 PM | Source : Fela News

तिलक लगाते समय उंगली का चुनाव भी बेहद खास माना गया है. शास्त्रों में हर उंगली से तिलक लगाने का अलग धार्मिक महत्व बताया गया है, जो जीवन पर अलग प्रभाव डालता है.
तिलक लगाते समय कौन-सी उंगली सही?
तिलक लगाते समय कौन-सी उंगली सही?

Puja Path ke Niyam:हिंदू सनातन परंपरा में माथे पर तिलक लगाना केवल धार्मिक रीति नहीं, बल्कि शुभता, सम्मान और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. पूजा-पाठ, मंदिर दर्शन, व्रत, त्योहार या किसी भी मांगलिक कार्य में तिलक लगाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि तिलक लगाने के लिए किस उंगली का इस्तेमाल सबसे शुभ माना जाता है? ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हर उंगली का संबंध अलग-अलग ग्रहों और ऊर्जाओं से होता है और इसी वजह से तिलक लगाने में सही उंगली का चयन बेहद महत्वपूर्ण माना गया है.

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हमारे हाथों की हर उंगली किसी न किसी ग्रह से जुड़ी होती है. यही कारण है कि पूजा या तिलक के समय गलत उंगली का प्रयोग शुभ फल को कम कर सकता है. धार्मिक मान्यताओं में कहा गया है कि सही उंगली से तिलक लगाने पर व्यक्ति को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है.

तिलक लगाने के लिए अनामिका यानी रिंग फिंगर को सबसे शुभ माना गया है. शास्त्रों के मुताबिक यह उंगली सूर्य और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होती है. मान्यता है कि अनामिका से तिलक लगाने पर मन शांत रहता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और शुभ फल प्राप्त होते हैं. यही वजह है कि मंदिरों और धार्मिक अनुष्ठानों में पुजारी भी अक्सर इसी उंगली से तिलक लगाते दिखाई देते हैं.

वहीं मध्यमा उंगली का संबंध शनि ग्रह से माना गया है. इसका प्रयोग कुछ विशेष तांत्रिक साधनाओं और धार्मिक कार्यों में किया जाता है, लेकिन सामान्य पूजा या शुभ अवसरों पर इससे तिलक लगाना उचित नहीं माना जाता. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसकी ऊर्जा गंभीर और कठोर प्रभाव वाली मानी जाती है.

तर्जनी उंगली से तिलक लगाने की मनाही बताई गई है. इसे निर्देश देने और डांटने का प्रतीक माना जाता है, इसलिए पूजा-पाठ में इसका इस्तेमाल अशुभ माना जाता है. वहीं अंगूठा शक्ति और इच्छाशक्ति का प्रतीक है, लेकिन देव पूजा में इसका प्रयोग कम किया जाता है.

शास्त्रों के अनुसार तिलक हमेशा स्नान और पूजा के बाद लगाना चाहिए. माथे के बीचों-बीच यानी आज्ञा चक्र पर लगाया गया तिलक सबसे शुभ माना जाता है. माना जाता है कि इससे मानसिक शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है.

धर्म में तिलक के कई प्रकार भी बताए गए हैं. चंदन का तिलक शांति और सौम्यता का प्रतीक माना जाता है, कुमकुम का तिलक शक्ति और मंगल का संकेत देता है, जबकि भस्म का तिलक आध्यात्मिकता और वैराग्य से जुड़ा माना गया है.

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