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दिल्ली में हर रोज़ 54 लोग गायब, सुरक्षा चिंता बढ़ी।

दिल्ली में हर रोज़ 54 लोग गायब, सुरक्षा चिंता बढ़ी।

Last Updated Feb - 02 - 2026, 06:01 PM | Source : Fela News

दिल्ली पुलिस के ताज़ा आंकड़ों में पता चला कि 1-15 जनवरी 2026 के बीच 807 लोग संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हुए। इनमें से अधिकांश महिलाएं और बच्चे हैं, सुरक्षा व्
दिल्ली में हर रोज़ 54 लोग गायब
दिल्ली में हर रोज़ 54 लोग गायब

दिल्ली में 2026 के पहले पंद्रह दिनों में लापता व्यक्तियों की संख्या ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था और सामाजिक संरचना को लेकर गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। दिल्ली पुलिस के जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार 1 जनवरी से 15 जनवरी 2026 के बीच कुल 807 लोगों की गुमशुदगी दर्ज की गई, मतलब औसतन हर दिन लगभग 54 लोग संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हो रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या महिलाओं और बच्चों की शामिल है। 

ये संख्या सिर्फ एक डेटा नहीं है, बल्कि यह राजधानी में सुरक्षा, परिवार की संरचना और नागरिकों के जीवन पर गहरी चिंता का संकेत है। 807 मामलों में से 572 लोग अभी भी पुलिस की तलाश से बाहर हैं और उनका कोई सुराग नहीं मिला है। यह तथ्य खुद में एक भयावह तस्वीर पेश करता है कि लापता होने वाले लोगों के मामलों में कितनी गंभीरता और तेजी से वृद्धि हो रही है। 

सबसे चिंताजनक बात यह है कि गुमशुदगी के मामलों में महिलाओं और लड़कियों की संख्या सबसे अधिक है। इन 807 में से लगभग दो-तिहाई लोग महिलाएं और बच्चियां हैं, जो राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा करते हैं। इस अवधि में 509 महिलाएं और बच्चियां लापता हुईं, जबकि 298 पुरुष गायब हुए । 

बच्चों की सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है। आंकड़ों के अनुसार इस पंद्रह दिनों में 191 नाबालिग लापता हुए हैं, जिसका मतलब है कि औसतन हर दिन करीब 13 बच्चे गायब हो रहे हैं। इस श्रेणी में 169 किशोर गिरोह शामिल हैं, जिनमें से 138 लड़कियां और 31 लड़के हैं। काफी 71 प्रतिशत किशोरों का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है, जो इस समस्या की गंभीरता को और भी बढ़ा देता है। 

और भी चौंकाने वाली बात यह है कि 8 साल से कम उम्र के बच्चे भी लापता सूची में शामिल हैं। 8 से 12 वर्ष की उम्र में 13 बच्चे और 8 साल से कम उम्र के 9 बच्चे गायब हुए हैं, जिनमें से कई अभी भी अनट्रेस्ड हैं। यह स्थिति बच्चों की सुरक्षा पर एक बड़ी चिंतनशील स्थिति को सामने लाती है। 

दिल्ली में यह समस्या नई नहीं है। पिछले वर्ष 2025 में राजधानी से कुल 24,508 लोगों के लापता होने की सूचना मिली थी, जिनमें से लगभग 60 प्रतिशत महिलाएं और बच्चियां थीं। पिछले दशक में भी राजधानी से लगभग 2,32,737 लोग लापता हुए, जिनमें से लगभग 1.8 लाख को ढूंढ लिया गया लेकिन लगभग 52,000 मामले अभी भी अनसुलझे हैं। 

विशेषज्ञों के अनुसार, लापता व्यक्तियों के मामलों के पीछे कई कारण हो सकते हैं पारिवारिक विवाद, सामाजिक और आर्थिक दबाव, ऑनलाइन प्रभाव, रिश्तों से जुड़े तनाव और कभी-कभी अपराधिक गिरोह या तस्करी का खतरा भी होता है। बच्चियों और महिलाओं की बढ़ती संख्या सुरक्षा एजेंसियों और परिवारों दोनों के लिए अलार्मिंग संकेत है। 

पुलिस प्रशासन उन मामलों की जांच कर रहा है और कई मामलों में परिवारों से मिलाने में सफलता भी मिली है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या के खिलाफ प्रभावी रणनीति की आवश्यकता स्पष्ट रूप से दिख रही है। यह समस्या सिर्फ पुलिस का मामला नहीं रह गई है, बल्कि यह सामाजिक सुरक्षा, परिवार व्यवस्था और नागरिकों की चिंता का विषय बन चुकी है। 

ये आंकड़े यह दिखाते हैं कि राजधानी में हर रोज़ दर्ज हो रहे लापता मामलों की संख्या को गंभीरता से लेना बेहद जरूरी है और इससे निपटने के लिए व्यापक नीति, जागरूकता और बेहतर सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है।

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