Header Image

उम्रकैद के बावजूद राम रहीम को पेरोल कैसे? 8 साल में 405 दिन बाहर

उम्रकैद के बावजूद राम रहीम को पेरोल कैसे? 8 साल में 405 दिन बाहर

Last Updated Jan - 06 - 2026, 06:09 PM | Source : Fela News

रेप और हत्या में उम्रकैद पाए गुरमीत राम रहीम को 8 साल में 15 बार पेरोल-फरलो मिली। सवाल उठ रहे हैं कि हरियाणा में उसे इतनी राहत कैसे मिलती रही।
उम्रकैद के बावजूद राम रहीम को पेरोल कैसे? 8 साल में 405 दिन बाहर
उम्रकैद के बावजूद राम रहीम को पेरोल कैसे? 8 साल में 405 दिन बाहर

रेप और हत्या जैसे जघन्य अपराधों में दोषी करार दिया गया Gurmeet Ram Rahim Singh एक बार फिर पेरोल मिलने को लेकर चर्चा में है। बीते आठ वर्षों में राम रहीम को 15 बार पेरोल और फरलो मिल चुकी है, जिसके जरिए वह कुल 405 दिन जेल से बाहर रह चुका है। यह आंकड़ा अपने आप में चौंकाने वाला है और इसी वजह से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर उम्रकैद की सजा पाने वाले कैदी को इतनी बार रियायत कैसे दी जा सकती है।

राम रहीम को दो साध्वियों से बलात्कार के मामले में 20 साल की सजा और एक पत्रकार की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा मिली हुई है। बावजूद इसके, वह बार-बार जेल से बाहर आता रहा है। ताजा पेरोल के बाद एक बार फिर विपक्षी दलों, सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने हरियाणा सरकार और जेल प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।

जानकारों के मुताबिक, राम रहीम को मिलने वाली पेरोल और फरलो के पीछे हरियाणा के जेल नियमों में किए गए संशोधन बड़ी वजह रहे हैं। आरोप है कि सरकार ने नियमों में ऐसे बदलाव किए, जिससे गंभीर अपराधों में सजा पाए कैदियों को भी पेरोल की सुविधा मिल सके। आलोचकों का कहना है कि यह बदलाव सामान्य कैदियों के लिए नहीं, बल्कि खास तौर पर राम रहीम जैसे प्रभावशाली दोषियों को राहत देने के लिए किए गए।

पेरोल और फरलो का उद्देश्य आम तौर पर कैदियों को पारिवारिक या सामाजिक कारणों से सीमित समय के लिए बाहर आने की अनुमति देना होता है, ताकि उनका समाज से संपर्क बना रहे। लेकिन सवाल यह है कि क्या रेप और हत्या जैसे अपराधों में दोषी व्यक्ति को बार-बार यह सुविधा देना नैतिक और कानूनी रूप से सही है?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राम रहीम के बड़े अनुयायी वर्ग और उसके प्रभाव के कारण सरकारें सख्त रुख अपनाने से बचती रही हैं। हर बार पेरोल मिलने पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं, जिससे सरकारी संसाधनों पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ता है।

विपक्षी दलों ने इसे "न्याय व्यवस्था का मजाक" करार दिया है। उनका कहना है कि आम कैदी वर्षों तक पेरोल के लिए तरसते रहते हैं, जबकि एक सजायाफ्ता रेपिस्ट और हत्यारा बार-बार बाहर आ जाता है। इससे पीड़ितों और उनके परिवारों को गलत संदेश जाता है।

वहीं सरकार की ओर से तर्क दिया जाता रहा है कि पेरोल कानून के दायरे में दी जाती है और इसमें नियमों का पालन किया गया है। हालांकि, बार-बार पेरोल मिलने के मामलों ने इस दावे को कमजोर किया है।

कुल मिलाकर, राम रहीम की पेरोल ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या भारत की जेल और पेरोल व्यवस्था प्रभावशाली अपराधियों के आगे नरम पड़ जाती है? यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है। 

Share :

Trending this week

मुंबई बुजुर्ग को 54 दिन डिजिटल अरेस्ट

May - 06 - 2026

मुंबई के भांडुप इलाके में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला म... Read More

46 वार से दंपति की हत्या

Apr - 22 - 2026

Moradabad News: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से एक दिल दहला देने वाल... Read More

दो पड़ोसन, गर्लफ्रेंड-दुल्हन टकराईं, दूल्हे की गलती से मेहंदी में हंगामा

Apr - 16 - 2026

Delhi News: दिल्ली के इंदिरा विहार में शादी से पहले खुशियों का ... Read More