Last Updated Feb - 26 - 2026, 11:21 AM | Source : Fela News
पटना के चाणक्य लॉ कॉलेज की छात्रा ने कथित तौर पर प्रेम संबंध के तनाव में आकर आत्महत्या कर ली। सुसाइड नोट में उसने खास नाम लिखा है।
पटना में एक गंभीर और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसमें चाणक्य लॉ कॉलेज की एक कॉलेज छात्रा ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। घटना ने न केवल परिवार को तोड़ा है बल्कि अन्य छात्रों और स्थानीय समाज में भी चिंता और सवाल पैदा कर दिए हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार छात्रा ने आत्महत्या से पहले एक सुसाइड नोट छोड़ा है, जिसमें उसने अपने प्रेम संबंध और तनाव से जुड़ी बातें लिखी हैं, जिससे यह मामला और भी संवेदनशील बन गया है।
यह घटना पटना के एक आवासीय इलाके में हुई, जहाँ छात्रा अपने परिवार के साथ रहती थी। पड़ोसियों की सूचना पर जब परिजन और पुलिस मौके पर पहुंचे, तौ छात्रा को बेहोश अवस्था में पाया गया। उसे तुरंत इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमॉर्टम और प्रारंभिक जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि उसने जहर खाकर आत्महत्या की कोशिश की थी।
परिवार और कॉलेज प्रशासन के अनुसार, छात्रा एक अच्छे रिकॉर्ड वाली विद्यार्थी थी और उसके व्यवहार में अचानक कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखा था। हालांकि सुसाइड नोट में उसने अपने प्रेम संबंध और अनुभवों का जिक्र किया है, जिसमें उसने बताया कि वह मानसिक रूप से तनाव और भावनात्मक दबाव का सामना कर रही थी। इसमें उसने अपनी प्रेमिका का नाम तथा कुछ भावनात्मक बातें लिखकर अपने निर्णय का संकेत दिया है।
पुलिस ने बताया कि सुसाइड नोट को कब्जे में लिया गया है और मामले की जांच जारी है। नोट में कुछ उल्लेख ऐसे भी हैं जो यह संकेत देते हैं कि छात्रा उस दशा में थी जहाँ उसे अपनी भावनात्मक पीड़ा से उबरने में कठिनाई हो रही थी। इस तरह के मामले अक्सर प्रेम संबंध, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक दबाव के जटिल मिश्रण से उत्पन्न होते हैं।
छात्रा की मौत से कॉलेज और उसके साथी छात्र भी गहरे सदमे में हैं। कॉलेज प्रशासन ने छात्रों को मानसिक स्वास्थ्य सहायता, काउंसलिंग और उचित समर्थन देने की पहल शुरू कर दी है। कई छात्रों ने बताया कि छात्रा एक सीधी-सादी और मिलनसार स्वभाव वाली थी, और किसी को भी यह उम्मीद नहीं थी कि वह इतने बड़े कदम तक पहुंच जाएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, युवा पीढी में इमोशनल स्ट्रेस, रिलेशनशिप प्रेशर और सामाजिक अपेक्षाएँ मिलकर कई बार मानसिक स्वास्थ्य के नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं। अपने विचार, भावनाएँ और तनाव को सही तरीके से व्यक्त न कर पाने की स्थिति में व्यक्ति आत्महत्या जैसे अंतिम कदम का सामना कर सकता है।
इसी कारण से यह मुद्दा केवल एक व्यक्तिगत घटना नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य चेतावनी का प्रतीक बन जाता है। आवश्यकता होती है। समय पर सहायता, काउंसलिंग और संवाद व्यक्ति को उस अंधकार से बाहर निकाल सकता है जिसमें वह खुद को अकेला अनुभव करता है।
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