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8th Pay Commission: पोस्टमैन से टीचर तक लाखों की मांग! कैसे तय होती सरकारी सैलरी?

8th Pay Commission: पोस्टमैन से टीचर तक लाखों की मांग! कैसे तय होती सरकारी सैलरी?

Last Updated Apr - 28 - 2026, 03:37 PM | Source : Fela News

8वें वेतन आयोग से पहले सरकारी कर्मचारियों की सैलरी को लेकर बड़ी बहस छिड़ गई है. शिक्षक 1.34 लाख और पोस्टमैन 1.12 लाख बेसिक की मांग कर रहे हैं, जानिए वेतन तय करने का पूरा गणित.
पोस्टमैन से टीचर तक लाखों की मांग!
पोस्टमैन से टीचर तक लाखों की मांग!

केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग की घोषणा क्या की, लाखों केंद्रीय कर्मचारियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही बन गया—इस बार तनख्वाह कितनी बढ़ेगी? इसी बीच अलग-अलग कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने अपनी मांगें रखनी शुरू कर दी हैं. सबसे ज्यादा चर्चा दो मांगों को लेकर है—शिक्षक 1.34 लाख रुपये बेसिक सैलरी चाहते हैं, जबकि पोस्टमैन संगठनों ने 1.12 लाख रुपये तक बेसिक पे की मांग कर डाली है.

शिक्षकों की बड़ी मांग

शिक्षक संगठनों ने सरकार से एंट्री लेवल शिक्षकों यानी लेवल-6 की बेसिक सैलरी 1,34,500 रुपये करने की मांग की है. इसके अलावा लेवल-1 कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन 50 से 60 हजार रुपये तय करने का प्रस्ताव भी दिया गया है. शिक्षकों का कहना है कि मौजूदा महंगाई, जीवनयापन और पेशेगत जिम्मेदारियों को देखते हुए मौजूदा वेतन ढांचा अब पर्याप्त नहीं है.

सिर्फ इतना ही नहीं, उन्होंने फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 2.62 से 3.83 तक करने और सालाना इंक्रीमेंट 3% से बढ़ाकर 6-7% करने की भी मांग रखी है.

पोस्टमैन ने भी रखी चौंकाने वाली डिमांड

फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन (FNPO) ने भी सरकार को मेमोरेंडम सौंपा है. संगठन ने लेवल-1 कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी 69 हजार रुपये और पोस्टमैन व मेल गार्ड की बेसिक सैलरी 1.12 लाख रुपये करने की मांग की है.

पोस्टल कर्मचारियों का तर्क है कि मौजूदा दौर में शहरों का खर्च, स्वास्थ्य, बच्चों की पढ़ाई और महंगाई को देखते हुए 7वें वेतन आयोग का ढांचा अब पुराना पड़ चुका है. इसलिए 3.83 फिटमेंट फैक्टर और 6% सालाना इंक्रीमेंट जरूरी है.

आखिर कैसे तय होती है पे कमीशन में सैलरी?

सरकारी कर्मचारियों की सैलरी सिर्फ मांग के आधार पर तय नहीं होती. इसके पीछे एक पूरा गणित होता है. सबसे पहले मौजूदा बेसिक पे को फिटमेंट फैक्टर से गुणा किया जाता है. इससे नया बेसिक वेतन निकलता है.

इसके बाद इसमें महंगाई भत्ता (DA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) जोड़े जाते हैं. यानी सिर्फ बेसिक पे नहीं, बल्कि भत्तों का पूरा पैकेज कर्मचारी की कुल सैलरी तय करता है.

ये 3 फैक्टर सबसे अहम

फिटमेंट फैक्टर: यही वेतन वृद्धि की रीढ़ होता है. जितना बड़ा फैक्टर, उतनी ज्यादा बेसिक सैलरी.

पे मैट्रिक्स लेवल: कर्मचारी किस लेवल पर है, उसी हिसाब से उसकी नई सैलरी तय होती है.

भत्ते और वार्षिक इंक्रीमेंट: DA, HRA, TA और हर साल मिलने वाली बढ़ोतरी कुल इनकम को बड़ा बनाते हैं.

अब सबकी नजर सरकार पर

शिक्षक हों, पोस्टमैन हों या दूसरे केंद्रीय कर्मचारी—सभी ने उम्मीदों का पिटारा खोल दिया है. अब देखना होगा कि 8वां वेतन आयोग कर्मचारियों की इन ऊंची मांगों को कितना स्वीकार करता है. क्योंकि इस बार वेतन बढ़ोतरी सिर्फ इंक्रीमेंट नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की आर्थिक राहत से जुड़ा मुद्दा बन चुकी है.

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