Last Updated Dec - 06 - 2025, 11:47 AM | Source : Fela News
Home Loan: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के रेपो रेट कम करने के बाद होम लोन की ब्याज दरों में बड़ी गिरावट आने की उम्मीद है. कहा जा रहा है कि रेट 2008 के ग्लोबल फाइने
Home Loan: RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी ने रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट घटाकर 5.25% कर दिया है. इसके बाद होम लोन रेट में बड़ी कमी आने की उम्मीद है. माना जा रहा है कि ब्याज दरें 2008 की आर्थिक मंदी से पहले वाले स्तर तक नीचे जा सकती हैं।
फिलहाल कई बैंक—जैसे यूनियन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और इंडियन ओवरसीज बैंक—7.35% पर होम लोन दे रहे हैं. रेपो रेट घटने के बाद यह रेट करीब 7.1% तक आ सकता है. इसी हिसाब से 15 साल के लिए 1 करोड़ रुपये के होम लोन पर EMI हर महीने लगभग 1,440 रुपये कम हो सकती है।
डिपॉजिट रेट घटाने का दबाव
बैंकर्स का कहना है कि नए ग्राहकों को 7.1% ब्याज पर लोन देने के लिए बैंकों को डिपॉजिट रेट कम करनी होगी या बेंचमार्क रेट में बदलाव करना पड़ेगा. ऐसा होने पर नए लोन लेने वालों को पुराने फ्लोटिंग-रेट ग्राहकों की तुलना में ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ सकता है।
जब तक डिपॉजिट रेट कम नहीं होती, बैंकों की नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर असर पड़ेगा. दूसरी तरफ NBFCs को फंडिंग कॉस्ट कम होने से तुरंत फायदा मिलेगा. एक्सपर्ट का कहना है कि यह पॉलिसी श्रीराम फाइनेंस जैसे लास्ट-माइल लेंडर्स के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि नई लिक्विडिटी सिस्टम को स्थिर बनाए रखेगी।
एक्सपर्ट्स की राय
गोल्डन ग्रोथ फंड के CEO अंकुर जालान का कहना है कि रेपो रेट कटौती से FD और अन्य सेविंग स्कीम्स पर रिटर्न कम हो सकते हैं. आने वाले महीनों में बैंक डिपॉजिट रेट और घटा सकते हैं, जिससे सेवर्स को अच्छे रिटर्न पाना मुश्किल हो सकता है. हालांकि कम ब्याज दरें आर्थिक विकास को सपोर्ट करती हैं और निवेशक अधिक रिटर्न पाने के लिए रियल एस्टेट-केंद्रित फंड्स की ओर जा सकते हैं।
अग्रशील इंफ्राटेक की CEO प्रेक्षा सिंह ने कहा कि भारत का रियल एस्टेट मार्केट पहले से निवेशकों के लिए आकर्षक है. अब ब्याज दरों में गिरावट के बाद निवेश और भी फायदेमंद हो जाएगा. कम EMI, स्थिर अर्थव्यवस्था और बढ़ती मांग मिलकर आने वाले महीनों में भारत को निवेश के लिए पसंदीदा डेस्टिनेशन बना सकते हैं।