Last Updated Jan - 27 - 2026, 10:59 AM | Source : Fela News
हर साल की शुरुआत में देश की नजरें बजट पर होती हैं. लेकिन कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि बजट पेश करने के लिए 1 फरवरी की तारीख ही क्यों चुनी गई है और इसके
Budget 2026: हर साल की शुरुआत में देश की नजरें बजट पर टिकी होती हैं, जब सरकार अपनी आर्थिक योजनाएं देश के सामने रखती है. आम लोगों से लेकर बड़े उद्योगों तक सभी को बजट से कुछ न कुछ उम्मीद होती है. इस साल भी बजट 1 फरवरी को पेश किया जाएगा. लेकिन अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि बजट के लिए यही तारीख क्यों तय की गई है.
ब्रिटिश दौर की पुरानी परंपरा
पहले बजट 1 फरवरी को नहीं, बल्कि फरवरी के आखिरी दिन पेश किया जाता था. यह व्यवस्था अंग्रेजों के समय से चली आ रही थी और आजादी के बाद भी लंबे समय तक जारी रही. साल 2017 तक इसी परंपरा के तहत बजट पेश होता रहा.
1 फरवरी को बजट लाने की नई व्यवस्था
2017 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट की तारीख बदलकर 1 फरवरी कर दी. सरकार का मानना था कि इससे नए वित्त वर्ष की तैयारी बेहतर तरीके से हो सकेगी. चूंकि नया वित्त वर्ष 1 अप्रैल से शुरू होता है, इसलिए पहले बजट पास होने में देरी होती थी और योजनाओं पर समय पर काम शुरू नहीं हो पाता था. अब 1 फरवरी को बजट आने से सरकार को फैसले लेने और फंड जारी करने के लिए ज्यादा समय मिल जाता है.
म्यूचुअल फंड निवेशकों को राहत की उम्मीद
बजट 2026-27 से म्यूचुअल फंड निवेशकों को भी सरकार से उम्मीदें हैं. म्यूचुअल फंड कंपनियों के संगठन एम्फी ने वित्त मंत्रालय को सुझाव भेजे हैं, जिनमें मध्यम वर्ग की बचत बढ़ाने और टैक्स में राहत देने की मांग की गई है. अगर सरकार इन सुझावों को मानती है, तो छोटे और मध्यम निवेशकों को सीधा फायदा मिल सकता है.
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