Last Updated Jul - 16 - 2025, 02:51 PM | Source : Fela news
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भारत में जून में खुदरा मुद्रास्फीति दर 2.1% पर पहुँच गई, जो पिछले छह वर्षों में सबसे कम है। यह गिरावट अर्थव्यवस्था में घरेलू मांग की धीमी गति तथा ऑटो और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों की मंदी से प्रेरित है। मुद्रास्फीति गिरकर आरबीआई को फिर से इकॉनमी को प्रोत्साहित करने के लिए दरों में कटौती करने की गुंजाइश दी है, विशेषकर जब जून में बैंक पहले ही 50 आधार अंक की कटौती कर चुके हैं ।
वर्तमान समय में बाजार में 'न्यूट्रल' नीति रुख संभवतः बनाए रखा जाएगा, लेकिन कई विश्लेषकों का मानना है कि सितंबर या अक्टूबर में RBI पुनः कटौती कर सकता है। विशेषकर तब जब टैक्स संग्रह और उपभोग व्यय सुस्त रहे। वित्त मंत्रालय की ओर से मोहलत ली गई मुद्रास्फीति में गिरावट और कच्चे तेल के स्थिर भाव दर्शाते हैं कि एक और कमाई मौसम में आर्थिक गति बनाए रख सकता है।
विश्लेषक डॉ. निसा गोस्वामी कहती हैं, “कम मुद्रास्फीति दर से RBI को राहत मिली है, लेकिन इन्हें रोजगार और विकास बनाए रखने के लिए आगे सोचने की जरूरत है।” वहीं, कुछ वित्तीय संस्थान इस बात पर सहमत हैं कि फिस्कल स्पेस काफी संकीर्ण है और इसलिए RBI मौद्रिक स्ट्रिमुलस को सीमित रखेगा।
अगले समय में सरकार और रिज़र्व बैंक की भूमिका यह सुनिश्चित करने में होगी कि बर्ख़ास्तगी की स्थिति न बन जाए, हालांकि ब्याज दरों में कटौती का असर उपभोक्ता वित्त पर सकारात्मक हो सकता है।