Last Updated Sep - 05 - 2025, 12:17 PM | Source : Fela News
RBI Not print Lot Of Money: आरबीआई देश में नोट छापता है, लेकिन वह बिना सीमा तय किए नोट नहीं छाप सकता। कुछ देशों ने ऐसा किया था और उनकी अर्थव्यवस्था पूरी तरह बर्
कई लोग सोचते हैं कि जब आरबीआई के पास नोट छापने की मशीन है, तो जितना चाहे उतना पैसा क्यों नहीं छापा जाता और लोगों में बांट दिया जाता। इससे गरीबी खत्म हो जाएगी और सब अमीर हो जाएंगे। लेकिन असलियत इससे बिल्कुल अलग है।
क्यों नहीं छापे जाते ढेर सारे नोट?
किसी देश की अर्थव्यवस्था सिर्फ नोटों से नहीं चलती, बल्कि उत्पादन, सेवाओं और संसाधनों पर निर्भर करती है। अगर बिना वजह नोट छापकर बाजार में डाल दिए जाएं तो चीजें और सेवाएं उतनी नहीं बढ़तीं, जितनी मुद्रा बढ़ जाती है। इसका असर महंगाई पर पड़ता है और हाइपर इन्फ्लेशन यानी अत्यधिक महंगाई की स्थिति बन जाती है। ऐसे में पैसे की कीमत घट जाती है और साधारण चीज खरीदने के लिए भी हजारों-लाखों रुपये देने पड़ते हैं। यही गलती दो देशों ने की और बर्बाद हो गए।
जिम्बाब्वे का हाल
अफ्रीकी देश जिम्बाब्वे में सरकार ने घाटा पूरा करने और लोगों को खुश करने के लिए लगातार नोट छापे। नतीजा यह हुआ कि वहां 100 ट्रिलियन डॉलर का नोट छापा गया, लेकिन उससे एक ब्रेड भी नहीं खरीदी जा सकी। महंगाई इतनी बढ़ गई कि नोटों के ढेर लग गए, लेकिन उनकी कोई कीमत नहीं बची। आखिरकार देश की अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो गई और वहां अमेरिकी डॉलर का इस्तेमाल करना पड़ा।
वेनेजुएला का संकट
तेल पर निर्भर रहने वाला वेनेजुएला 2014 के बाद तबाह होने लगा, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें गिर गईं। सरकार के पास खर्च और योजनाओं के लिए पैसे नहीं थे, तो उसने बड़े पैमाने पर नोट छापने शुरू किए। शुरुआत में लगा कि इससे समस्या सुलझ जाएगी, लेकिन मुद्रा की मात्रा वस्तुओं और सेवाओं से कई गुना ज्यादा हो गई। 2018 तक महंगाई दर 10,00,000% से ऊपर पहुंच गई। सरकार को नोटों से शून्य हटाने पड़े और हालात इतने खराब हो गए कि लाखों लोग भूख से मरने की कगार पर पहुंच गए।