Last Updated Dec - 04 - 2025, 04:02 PM | Source : Fela News
रुपये की गिरावट निवेश, महंगाई और आयात पर असर डाल सकती है, लेकिन विशेषज्ञ स्थिति को नियंत्रित मानते हैं। घबराहट से ज्यादा समझ जरूरी है।
डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी को लेकर बाजार में घबराहट जरूर दिखी, लेकिन सरकार की ओर से आए बयान ने हालात को लेकर एक अलग ही तस्वीर पेश की है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन का कहना है कि रुपये की गिरावट उतनी चिंता की बात नहीं, जितनी दिख रही है।
बीते दिनों रुपये ने 90 प्रति डॉलर का स्तर छू लिया, जिसके बाद चर्चा तेज हो गई कि भारतीय अर्थव्यवस्था दबाव में है। कई निवेशक और आम लोग इसे लेकर परेशान दिखे, लेकिन नागेश्वरन ने साफ कहा कि यह गिरावट अस्थायी है और इसके पीछे वैश्विक परिस्थितियों का असर ज्यादा है। उनके अनुसार, डॉलर इन दिनों लगभग सभी मुद्राओं के मुकाबले मजबूत हो रहा है, इसलिए रुपया ही अकेला कमजोर नहीं पड़ा।
नागेश्वरन ने यह भी कहा कि भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था स्थिर है और विकास दर मजबूत बनी हुई है। विदेशी निवेश, उत्पादन से जुड़े आंकड़े और सेवाओं का क्षेत्र अब भी अच्छी स्थिति में है। ऐसे में रुपये का थोड़ा कमजोर होना किसी आर्थिक संकट का संकेत नहीं, बल्कि वैश्विक बाज़ारों में चल रहे उतार-चढ़ाव की सामान्य प्रतिक्रिया है।
सरकार का दावा है कि आने वाले साल में हालात सुधरेंगे और रुपया अपनी स्थिति वापस पा लेगा। उनका कहना है कि जैसे-जैसे महंगाई नियंत्रित होगी और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार स्थिर होगा, विदेशी निवेशकों का भरोसा फिर बढ़ेगा और इसका सीधा असर भारतीय मुद्रा पर पड़ेगा। रिज़र्व बैंक भी स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप करता रहा है।
बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत मजबूत आर्थिक आधार पर खड़ा है, इसलिए लंबी अवधि में रुपये को लेकर डरने की जरूरत नहीं है। हालांकि, वैश्विक अस्थिरता बनी रहने तक थोड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।
कुल मिलाकर संदेश यही है, रुपये की गिरावट बड़ी खबर जरूर है, लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं। सरकार को भरोसा है कि आने वाले समय में हालात फिर सामान्य हो जाएंगे और रुपया अपनी मजबूती वापस हासिल कर लेगा।
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