Last Updated Mar - 18 - 2025, 03:53 PM | Source : Fela News
रतन टाटा एंडोमेंट फाउंडेशन (RTEF) एक सेक्शन 8 कंपनी है, जो चैरिटी से जुड़े काम करती है। वहीं, RTET एक प्राइवेट ट्रस्ट है, जो भारतीय ट्रस्ट एक्ट, 1882 के तहत संच
नोएल टाटा बने RTET के बोर्ड सदस्य, डेरियस खंबाटा ने दिया इस्तीफा
नोएल टाटा, जो टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन हैं, अब रतन टाटा एंडोमेंट ट्रस्ट (RTET) के बोर्ड में शामिल हो गए हैं। उनके साथ शिरीन और दीना जिजीभॉय, जो रतन टाटा की सौतेली बहनें हैं, को भी ट्रस्ट में नियुक्त किया गया है। इन नियुक्तियों को प्रमित झावेरी और डेरियस खंबाटा ने मंजूरी दी। इसके अलावा, टाटा ग्रुप के दो अधिकारी, आर.आर. शास्त्री और जमशेद पोंचा, को भी ट्रस्ट में शामिल किया गया। इन बदलावों के बाद डेरियस खंबाटा ने RTET के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया।
रतन टाटा की विरासत और ट्रस्ट की भूमिका
रतन टाटा ने अपनी संपत्ति और चैरिटेबल कामों के लिए यह ट्रस्ट बनाया था, जो उनकी संपत्ति का प्रबंधन करेगा और दान के लिए फंड जुटाएगा। उनकी वसीयत के अनुसार, संपत्ति का बंटवारा हाई कोर्ट की मंजूरी के बाद शुरू होगा, जिसमें लगभग छह महीने लग सकते हैं। शिरीन और डीना जिजीभॉय, वसीयत के एक्जीक्यूटर हैं।
RTET और RTEF का महत्व
रतन टाटा एंडोमेंट फाउंडेशन (RTEF) एक सेक्शन 8 कंपनी है, जो चैरिटेबल कामों पर ध्यान देती है।
RTET एक प्राइवेट ट्रस्ट है, जो भारतीय ट्रस्ट एक्ट, 1882 के तहत काम करता है।
एंडोमेंट फंड निवेश से पूँजी बढ़ाकर चैरिटी के लिए आय उत्पन्न करता है, जबकि ट्रस्ट संपत्ति का प्रबंधन और दान के उद्देश्य को सुनिश्चित करता है।
नियुक्तियों की जरूरत क्यों पड़ी?
विशेषज्ञों के अनुसार, ये नियुक्तियां ट्रस्ट की गवर्नेंस और संचालन को मजबूत करेंगी, जिससे फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे। इससे रतन टाटा की चैरिटेबल योजनाओं को और प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकेगा।
सूत्रों के मुताबिक, RTET और टाटा ट्रस्ट्स मिलकर बड़े सामाजिक प्रोजेक्ट्स पर काम कर सकते हैं, जिससे टाटा ग्रुप के चैरिटेबल मिशन को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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