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Groww पर SEBI ने ₹80.35 लाख का जुर्माना लगाया, कई नियम उल्लंघनों को लेकर सेटलमेंट समझौता

Groww पर SEBI ने ₹80.35 लाख का जुर्माना लगाया, कई नियम उल्लंघनों को लेकर सेटलमेंट समझौता

Last Updated May - 29 - 2025, 12:38 PM | Source : Fela News

इंडियाबुल्स म्यूचुअल फंड के अधिग्रहण के बाद सामने आईं तकनीकी और नियामक खामियों पर सख्ती, सेबी ने निवेशकों की सुरक्षा पर जताई चिंता।
Groww पर SEBI ने ₹80.35 लाख का जुर्माना लगाया
Groww पर SEBI ने ₹80.35 लाख का जुर्माना लगाया

भारत के प्रमुख ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म्स में शामिल Groww ने बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) को ₹80.35 लाख का भुगतान किया है। यह सेटलमेंट कई तरह की जांचों को निपटाने के लिए किया गया, जिनमें रेगुलेटरी, तकनीकी और संचालन से जुड़ी गड़बड़ियां सामने आई थीं। ये सभी मुद्दे इंडियाबुल्स म्यूचुअल फंड के अधिग्रहण के बाद उजागर हुए।

SEBI के 27 मई को जारी आदेश के अनुसार, Groww द्वारा किए गए कई गंभीर उल्लंघनों से निवेशकों की सुरक्षा, सिस्टम की मजबूती और नियामकीय अनुपालन पर सवाल उठे।

सबसे गंभीर मामला 38 मौकों पर ग्राहकों के खातों में दर्शाए गए बैलेंस और उनके मार्जिन दायित्वों में अंतर का रहा। इन गलत आंकड़ों को ग्राहकों को भेजे गए रिटेंशन स्टेटमेंट्स में भी दिखाया गया।

SEBI की जांच में यह भी पाया गया कि Groww का ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म यूज़र्स को बाजार में उपलब्ध सबसे अच्छी कीमत पर डिफॉल्ट नहीं करता था, बल्कि पहले से तय प्राथमिकताओं को ही लागू रखता था। यह डिजाइन निवेशकों के हितों के खिलाफ माना गया।

इसके अलावा, Groww ने सेबी के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद अपनी ऐप पर क्लीयरिंग कॉरपोरेशनों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी नहीं दी, जो ट्रांसपेरेंसी और बेहतर एग्जीक्यूशन के लिए जरूरी है।

SEBI ने यह भी नोट किया कि Groww अपने ट्रेडिंग ऐप पर UPI पेमेंट्स, बिल पेमेंट्स और लेंडिंग जैसे नॉन-सिक्योरिटी प्रोडक्ट्स भी होस्ट कर रहा था, जिससे निवेशकों को अनजाने वित्तीय जोखिम उठाने पड़ सकते हैं, खासकर UPI विवादों की स्थिति में।

इसके साथ ही Groww की जोखिम प्रबंधन प्रणाली को भी कमजोर पाया गया। ऐप या वेबसाइट बंद होने की स्थिति में यूज़र्स के पास कोई बैकअप एक्सेस नहीं था, जिससे वे अपने निवेश समय पर नहीं निकाल सकते थे। कंपनी का बिजनेस कंटीन्यूइटी प्लान (BCP) भी सेबी के निर्धारित 6 महीने की बजाय साल में एक बार ही रिव्यू किया जा रहा था।

इस बीच Groww ने अपने आईपीओ के लिए भी SEBI के पास कॉन्फिडेंशियल प्री-फाइलिंग रूट के तहत कागज़ात जमा किए हैं। इस रास्ते से कंपनी पब्लिक डॉक्युमेंट्स को शुरू में सार्वजनिक किए बिना अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी कर सकती है।

फेला न्यूज़ की सलाह: निवेशक ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर निवेश से पहले नियमों के पालन और सुरक्षा उपायों की पूरी जानकारी जरूर लें।

 

 

 

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