Last Updated Jan - 13 - 2026, 04:49 PM | Source : Fela News
डॉलर सबसे लोकप्रिय है, लेकिन सबसे महंगी नहीं। जानिए दुनिया की टॉप-5 सबसे मजबूत करेंसी कौन-सी हैं और अमेरिकी डॉलर क्यों पीछे रह गया।
जब भी दुनिया की सबसे ताकतवर करेंसी की बात होती है, तो सबसे पहले दिमाग में अमेरिकी डॉलर का नाम आता है। इंटरनेशनल ट्रेड, फॉरेक्स मार्केट और ग्लोबल इकॉनमी में डॉलर की मौजूदगी इतनी मजबूत है कि लोग उसे ही सबसे शक्तिशाली मुद्रा मान लेते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि करेंसी की "ताकत" सिर्फ उसके चलन से तय नहीं होती, बल्कि उसकी एक यूनिट की कीमत भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती है। इसी पैमाने पर देखें तो अमेरिकी डॉलर टॉप-5 सबसे मजबूत करेंसी की लिस्ट में कहीं नजर नहीं आता।
अक्सर यह गलतफहमी होती है कि जिस देश की अर्थव्यवस्था बड़ी होती है, उसकी करेंसी भी सबसे महंगी होगी। असल में करेंसी की वैल्यू कई फैक्टर्स पर निर्भर करती है—जैसे मौद्रिक नीति, बाजार में मुद्रा की सप्लाई, विदेशी मुद्रा भंडार, महंगाई दर और देश के पास मौजूद प्राकृतिक संसाधन । अमेरिका ने जानबूझकर डॉलर की सप्लाई ज्यादा रखी है ताकि ग्लोबल ट्रेड आसान रहे। यही वजह है कि डॉलर सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली करेंसी तो है, लेकिन सबसे महंगी नहीं।
दुनिया की सबसे मजबूत करेंसी का ताज Kuwait के कुवैती दिनार के पास है। एक कुवैती दिनार की कीमत भारतीय रुपये में लगभग 290 से 300 रुपये के आसपास रहती है। कुवैत के पास विशाल तेल भंडार है और सरकार ने मुद्रा की सप्लाई को सीमित रखा है, जिससे इसकी वैल्यू लगातार ऊंची बनी हुई है।
दूसरे नंबर पर आता है Bahrain का बहरीन दिनार । इसकी कीमत करीब 230 रुपये से ज्यादा होती है। बहरीन दिनार को अमेरिकी डॉलर से पेग किया गया है, जिससे इसमें ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं आता और स्थिरता बनी रहती है।
तीसरे स्थान पर Oman का ओमानी रियाल है, जिसकी कीमत लगभग 235-240 रुपये के बीच रहती है। ओमान सरकार ने
जानबूझकर अपनी करेंसी की वैल्यू ऊंची रखी है और तेल निर्यात से मजबूत सपोर्ट मिलता है।
टॉप-5 में आगे Jordan का जॉर्डनियन दिनार और United Kingdom का ब्रिटिश पाउंड आते हैं। जॉर्डनियन दिनार भी डॉलर से ज्यादा महंगा है, जबकि ब्रिटिश पाउंड यूरोप की सबसे मजबूत मुद्राओं में गिना जाता है।
निष्कर्ष साफ है –डॉलर भले ही दुनिया की सबसे लोकप्रिय और भरोसेमंद करेंसी हो, लेकिन “सबसे मजबूत" की रेस में वह कई छोटी अर्थव्यवस्थाओं से पीछे है। यह साबित करता है कि करेंसी की ताकत सिर्फ नाम या प्रभाव से नहीं, बल्कि उसकी वैल्यू और नीति से तय होती है।