Last Updated Dec - 11 - 2025, 05:22 PM | Source : Fela News
चांदी (सिल्वर) ने इंटरनेशनल मार्केट में अपना भाव ऑल-टाइम हाई पर पहुंचा दिया है और भारत में भी 1 किलो चांदी की कीमत करीब ₹2 लाख के स्तर तक झलकने लगी है, एक ऐसी स
चांदी की कीमतों में यह अप्रत्याशित उछाल सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चल रहा है। इंटरनेशनल मार्केट में चांदी का भाव लगभग $62.50 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है, जिससे देश के सराफा बाजार में करीब ₹2,05,000+ प्रति किलो का भाव देखने को मिल रहा है।
इस तेजी के पीछे कई बड़े कारण हैं:
सबसे पहले, उद्योगों की मांग में जबरदस्त वृद्धि है। चांदी को सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं देखा जाता, यह सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), डेटा-सेंटर, 5G और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे नए तकनीकी क्षेत्रों में भी एक महत्वपूर्ण कच्चा माल बन चुकी है, जिसके कारण वैश्विक डिमांड लगातार बढ़ रही है।
दूसरा, आपूर्ति-की कमी एक बड़ा फैक्टर है। पिछले कई सालों से चांदी के उत्पादन और आयात में कमी देखी जा रही है, जिससे बाजार में उपलब्ध सप्लाई कम पड़ रही है। यह डिमांड-सप्लाई डिफिसिट भाव को ऊपर धकेल रहा है।
तीसरी वजह है ब्याज दरों और मुद्रा की स्थिति। अमेरिकी फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती और डॉलर की कमजोरी ने उन निवेशकों को आकर्षित किया है जो सुरक्षित परिसंपत्तियों में निवेश करना चाहते हैं। इससे भी चांदी की मांग और कीमत बढ़ी है।
चांदी की बढ़ती लोकप्रियता को निवेश विकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है। इसमें निवेशकों की भागीदारी, खासकर सिल्वर ETF और डिजिटल बायिंग प्लेटफॉर्म्स, ने कीमत में और तेजी लाई है।
जबकि सोने की कीमतें भी तेज़ी से बढ़ी हैं, चांदी का परसेंटेज रिटर्न उन दोनों के बीच कुछ मामलों में अधिक रहा है। 2025 में चांदी ने लगभग 108% तक की वृद्धि दर्ज की है, जो कि सोने के मुकाबले अधिक है।
सराफा बाजार में चांदी के रेट में यह निरंतर रिकॉर्ड-ब्रेकिंग मूव निवेशकों और ज्वैलर्स दोनों के लिए दिलचस्प है। त्योहारों और औद्योगिक मांग के दौरान इसकी चमक और बढ़ सकती है, लेकिन ट्रेड एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि निवेश निर्णय लेने से पहले बाजार की अस्थिरता को भी ध्यान में रखा जाए।
कुल मिलाकर, चांदी का यह शानदार रिटर्न और रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना वैश्विक अर्थव्यवस्था, तकनीकी मांग, सप्लाई संकट और निवेशकों के विश्वास का परिणाम है जिसने सोने को भी पीछे छोड़ दिया है।